
दिल्ली; दिल्ली सरकार और एलजी के बीच ट्रांसफर व पोस्टिंग को लेकर जारी खींचतान के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश 18 जनवरी को सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर केंद्र और दिल्ली सरकार की विधायी व कार्यकारी शक्तियों के दायरे को लेकर फैसला आ गया है. 5 जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस ने सभी जजों की सहमति से फैसला सुनाया है.
दिल्ली
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) May 11, 2023
➡️दिल्ली सरकार बनाम LG केस में 'सुप्रीम' फैसला
➡️दिल्ली मामले पर सुनाया जा रहा है फैसला
➡️सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच सुना रही फैसला
➡️सभी जजों की सहमति से फैसला- सुप्रीम कोर्ट
➡️ये बहुमत का फैसला है- सीजेआई
➡️हम 2019 के फैसले से सहमत नहीं- CJI
➡️केंद्र की… pic.twitter.com/a0lfxED44K
दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र और संघवाद के सिद्धांत बुनियादी संरचना संघवाद का एक हिस्सा है, जो विविध हितों के अस्तित्व को सुनिश्चित करता है. वहीं, विविध आवश्यकताओं को समायोजित करते हैं.
5 जजों की पीठ ने कहा कि राज्यों के पास शक्ति है, लेकिन राज्य की कार्यकारी शक्ति संघ के मौजूदा कानून के अधीन है. यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्यों का शासन संघ द्वारा अपने हाथ में न लिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर प्रशासनिक सेवाओं को विधायी और कार्यकारी डोमैन से बाहर रखा जाता है, तो मंत्रियों को उन सिविल सेवकों को कंट्रोल करने से बाहर रखा जाएगा. जिन्हें कार्यकारी निर्णयों को लागू करना है.








