बगावती सुर के बाद रुस में शांति, पुतिन के खिलाफ क्यों खड़ा हुआ था वैगनर ग्रुप

रुस के तख्तापलट की स्थिति पर दुनिया के कई देशों की नजरें थी.लेकिन वैगनर ग्रुप के पीछे हटने की बात पर वो लोग भी हैरान रह गए.

डिजिटल डेस्क- रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए घातक बने वैगनर ग्रुप के बागवत के अंत के बाद से रुस में इस समय थोड़ी सी शांति छा गई है. लेकिन बार बार रुस में राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ कहीं न कहीं विद्रोह की आवाजें उठती रहती है.

कहा जाता है कि अपने विद्रोहियों को चुप कराने में पुतिन काफी फेमस है.वहीं वैगनर ग्रुप के लिए कहा जाता है कि वो दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकों में से एक है. बता दें कि रुस में तख्तापलट के इरादे से वैगनर ग्रुप एक्टिव हुआ था. लेकिन कुछ ही समय में लड़ाकों की एक्टिवविटी शांत हो गई.जो मॉस्को की तरफ तेजी से बढ़ रहा था.

वहीं रुस के तख्तापलट की स्थिति पर दुनिया के कई देशों की नजरें थी.लेकिन वैगनर ग्रुप के पीछे हटने की बात पर वो लोग भी हैरान रह गए. मीडिया रिपोर्ट्स के द्वारा कहा जाने लगा कि वैगनर ग्रुप के अटैकिंग मोड की जानकारी पर पुतिन कई गायब ही हो गए थे.

पुतिन के खिलाफ क्यों खड़ा हुआ वैगनर ग्रुप
दरअसल, वैगनर ग्रुप रुसी प्राइवेट आर्मी है. जिसका नेतृत्व येवेगनी प्रिगोझिन कर रहे थे. और प्रिगोझिन ने यूक्रेन में तैनात अपनी सेना को मॉस्को की तरफ कूच करने को कहा था. प्रिगोझिन ने अपनी इस प्लानिंग को तख्तापलट नहीं बल्कि न्याय के लिए मार्च का नाम दिया था. उन्होंने पुतिन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए रुसी सेना की ओर से चल रहे गलत कामों को खत्म करने का फैसला लिया था.

पुतिन के खिलाफ बगावत को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि रुस वैगनर ग्रुप के लड़ाकों को सेना में शामिल करना चाहते थे. इस प्रस्ताव से प्रिगोझिन को अपने संगठन की तरफ खतरा नजर आने लगा.इसके अलावा लड़ाकों के साथ भेदभाव की भी शिकायत मिल रही थी.

विद्रोह को खत्म कराने में बेलारुस की भूमिका !
माना जाता है कि विवाद के बीच रुसी राष्ट्रपति पुतिन ने बेलारुस के राष्ट्रपति से बातचीत की. इसके बाद प्रिगोझिन से मध्यस्थता की पेशकश की गई. और प्रिगोझिन ने उनकी बात को मानते हुए अपने लड़कों को पीछे हटने का आदेश दे दिया.

कहां है पुतिन !

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वैगनर ग्रुप के बगावती सुर के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने देश को संबोधित किया. उन्होंने वैगनर चीफ प्रिगोझिन पर धोखा देने का आरोप लगाया. हालांकि इस चुनौती के बाद से मानों पुतिन गायब ही हो गए है. दो दिन से ज्यादा का समय हो गया है.और अपने संबोधन के बाद से पुतिन दिखाई नहीं दिए है.

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