
20 अक्टूबर 2023, नवरात्रि का छठा दिन है. आज के दिन मां कात्यायनी की पूजा उपासना की जाती है. मां का यह स्वरुप सफलता, यश, संयम और साधना का प्रतीक है. मां कात्यायनी की जो भी भक्त उपासना करता है, उसे अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष के प्रती चारों फलों की प्राप्ति होती है. मां की इस उपासना से रोग, भय, शोक, संताप सब नष्ट हो जाता हैं. इनकी पूजा आराधना से जिनके शादी नहीं हो रही उनके योग बनते हैं, और उनके लिए मनचाहा जीवनसाथी मिलता है. एसा माना जाता है कि द्वापर युग के समय भगवान कृष्ण को अपनाने के लिए गोपियों ने मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की थी. मां कात्यायनी ”कात्य गोत्र” में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन के घर में जन्म ली इसलिए मां देवी को कात्यायनी के नाम से लोग जानते है.
मां कात्यायनी का स्वरूप एसा माना गया है की अत्यंत भव्य और दिव्य अलौकित है. इनका चेहरा में स्वर्ण के समान चमकीला और अलग सा तेज है. मां कात्यायनी की चार भुजाएं होती हैं और मां कि दायीं भुजा ओर की ऊपरी भुजा अभयमुद्रा में होती है. वहीं दूसरी भुजा में मां कात्यायनी के वरमुद्रा और तीसरी भुजा में तलवार के साथ और चौथी भुजा में कमल के फूल सुशोभित हैं. मां का वाहन शेर है. मां कात्यायनी को लाल रुचिकर पुष्प रंग अत्यन्त प्रिय है. इसलीए मां को लाल कमल, लाल गुलाब, लाल कनेर, गुड़हल, जैसे पुष्प अर्पित किया जाता है. और वहीं भोग की बात की जाए तो माता रानी को शहद अत्यन्त प्रिय होता है. इसलिए शहद का भोग माता रानी को चढ़ाने से मां प्रसन्न हो जाती हैं.
पूजन मंत्र के समय सभी को पहले प्रातः सवेरे उठ कर स्नान कर साफ़ सुद्ध कपड़े पहनें और गंगा जल की बूंदे अपने ऊपर डाल कर खुद को शुद्ध कर पूजन का सुभारभं करें. मां की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं और तत्पश्चात पुष्प, अक्षत, रोली, नैवेद्य, वस्त्र चढ़ायें माता रानी को शहद का भोग लगाएं और आरती करने के दौरान पूजा पाठ में हुई त्रुटि के लिए क्षमा मांगा जाता है. अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां कात्यायनी के मंदिर में श्रृंगार और पूजन से संबंधित चीजों का दान अवस्य करें. जिससे सभी मनोकामना पूर्ण हो जायेंगी.









