कानपुर में 36 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, गोवंश ट्रस्ट के खाते से चल रहा था ठगी का खेल

कानपुर: देशभर में गोवंश संरक्षण के नाम पर ट्रस्ट बनाकर साइबर ठगी की रकम मंगाने वाले गिरोह का कानपुर पुलिस ने खुलासा किया है। फीलखाना थाना पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने कार्रवाई करते हुए एक्सिस बैंक कर्मचारी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

वही पुलिस जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट के खाते से पिछले दो साल में करीब 36 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते से जुड़ी 178 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिली हैं।

ट्रस्ट खाते से हुआ 36 करोड़ का लेनदेन

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के मुताबिक, फतेहपुर निवासी सूरज निषाद ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर दो साल पहले ‘गोमाता गोरक्षा सेवा मंच’ नाम से ट्रस्ट बनाया था। ट्रस्ट का बैंक खाता माल रोड स्थित एक्सिस बैंक में खुलवाया गया था।

पुलिस के अनुसार, बैंक खाता खुलवाने में बिठूर निवासी विक्रम कुमार की भूमिका सामने आई, जो बैंक में खाते खुलवाने का काम करता था। बाद में सूरज ने यह खाता विक्रम और उसके साथी रोहित मल्होत्रा को उपलब्ध करा दिया। इसी खाते में डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों से ठगी गई रकम देशभर से ट्रांसफर की जाती थी।

178 साइबर ठगी मामलों से जुड़ा खाता

एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि इस बैंक खाते से जुड़े 178 साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं। बता दे कि खाते में हुए लेनदेन का स्तर इतना ज्यादा था कि सिर्फ सात दिन का बैंक स्टेटमेंट ही 5766 पेज का निकला। पुलिस ने सूरज निषाद और विक्रम कुमार को चार्लिस चौराहा, फूलबाग बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार किया है।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि खाते में आने वाली ठगी की रकम का एक निश्चित हिस्सा उन्हें मिलता था। पुलिस के मुताबिक, NCRP शिकायतों के आधार पर ट्रस्ट के खाते में करीब 7 करोड़ रुपये पहले ही होल्ड किए जा चुके हैं।

बैंकिंग दस्तावेज और फर्जी मुहर बरामद

पुलिस ने विक्रम कुमार के पास से 15 नए ग्राहकों की बैंक किट, चेकबुक, पासबुक, ऋण प्रपत्र और अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा एक्सिस बैंक, फिनो पेमेंट बैंक समेत अन्य बैंकों के चार खाते भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

फर्जी दस्तावेज बनाने का भी आरोप

तलाशी के दौरान पुलिस को कई सारे फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। इनमें से कल्याणपुर के पूर्व विधायक सतीश निगम के नाम की एक मुहर मिली, जिसमें उनके नाम के आगे पार्षद लिखा था। इसके अलावा वार्ड-19 कल्याणपुर दक्षिण की पार्षद ज्योति पासवान के पति दिनेश पासवान के नाम की मुहर और लेटरपैड भी मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि इनका इस्तेमाल बैंक लोन और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के लिए फर्जी कागजात तैयार करने में किया जाता था।

विक्रम था नेटवर्क का हैंडलर

डीसीपी पूर्वी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। विक्रम इस नेटवर्क का हैंडलर था। गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने साइबर गिरोहों को बैंक खाते उपलब्ध कराए गए और इसमें किसी अन्य बैंक कर्मचारी की भूमिका तो नहीं है।

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