इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्त सहायक प्रबंधकों को मिली राहत, नौकरी होगी बहाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक में वर्षों पहले नियुक्त हुए सहायक प्रबंधकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी राहत भरी खबर आई है। कोर्ट ने बैंक प्रबंधन द्वारा इन कर्मचारियों की सेवा समाप्त किए जाने के फैसले को रद्द करते हुए इन्हें दोबारा नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया है।

मामला उन दर्जनों कर्मचारियों से जुड़ा था, जिन्हें चयन प्रक्रिया के जरिए सहायक प्रबंधक के पद पर नियुक्त किया गया था और वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे थे। बाद में एक विभागीय जांच के आधार पर यह कहते हुए इनकी नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं कि भर्ती के दौरान नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके चलते बैंक प्रबंधन ने इन सभी कर्मचारियों को एक झटके में नौकरी से बाहर कर दिया था।

पीड़ित कर्मचारियों ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि बर्खास्तगी का फैसला बैंक प्रबंधन ने अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से नहीं लिया था, बल्कि यह पूरी तरह राज्य सरकार के सहकारिता विभाग के निर्देश पर हुआ था। कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी की नौकरी सिर्फ इसलिए नहीं छीनी जा सकती कि किसी उच्चाधिकारी ने ऐसा करने को कहा है कि बर्खास्तगी जैसा गंभीर फैसला लेने से पहले संबंधित प्राधिकारी को खुद पूरे मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करना जरूरी है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

इसी आधार पर कोर्ट ने बर्खास्तगी से जुड़े तमाम आदेशों को खारिज कर दिया और साफ निर्देश दिया कि सभी प्रभावित कर्मचारियों को उसी पद पर वापस काम पर रखा जाए, जिस पद पर वे बर्खास्तगी से पहले कार्यरत थे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस अवधि तक ये कर्मचारी नौकरी से बाहर रहे, उस दौरान का वेतन उन्हें नहीं मिलेगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले में जोरदार पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने की, जिन्हें अदालत में उत्सव मिश्रा, हर्ष वर्धन मेहरोत्रा और क्षितिज मिश्रा जैसे अधिवक्ताओं का सहयोग मिला। इस फैसले को कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण नजीर के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह रेखांकित करता है कि सरकारी दबाव में लिए गए फैसले अदालत की कसौटी पर टिक नहीं सकते।

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