
शुक्रवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने यह दावा किया कि कुछ समाचार चैनलों का एकमात्र इरादा “सार्थक चर्चा” के माध्यम से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं बल्कि इस्लाम का उपहास करना और इसे बदनाम करना है.” पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े इस्लाम के अनुयायियों ने इस्लामी विद्वानों और बुद्धिजीवियों को किसी भी बहस में भाग नहीं लेने के लिए कहा है.
AIMPLB अध्यक्ष मौलाना सैयद मोहम्मद राबे हसनी नदवी सहित मुस्लिम निकाय के शीर्ष पदाधिकारियों ने एक सांझा बयान में कहा कि ऐसे चैनलों को अपनी बहस में मुस्लिम चेहरों की जरुरत होती है. वो अपने एजेंडे के तहत उन्हें चर्चाओं में बुलाते हैं और इस्लाम एवं मुसलमानों का मजाक बनाने वाले कृत्यों को वैधानिक मान्यता देते हैं.
“AIMPLB अध्यक्ष मौलाना सैयद मोहम्मद राबे हसनी नदवी और उपाध्यक्ष – मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी, मौलाना काका सईद अहमद ओमरी, मौलाना सैयद शाह फखरुद्दीन अशरफ, मौलाना सैयद अरशद मदनी ने इस्लामिक विद्वानों से यह अपील की कि ऐसे किसी भी समाचार चैनल की चर्चाओं का हिस्सा ना बने जो इस्लाम एवं मुसलमानों का मजाक बनाने वाले कृत्यों को वैधानिक मान्यता देते हैं.
पर्सनल लॉ बोर्ड के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि इन डिबेट्स में खुद मौलानाओं और इस्लामिक धर्मगुरुओं का अपमान होता है. उनके चर्चा का हिस्सा बनने में उनका खुद का मजाक उड़ाया जाता है. यही कारण है कि इस्लाम और मुसलामानों को इसकी जलालत का नतीजा भुगतना पड़ रहा है. बहरहाल, AIMPLB ने शुक्रवार को इस्लामिक धर्मगुरुओं को किसी भी डिबेट का हिस्सा बनने से मना करने की अपील की.









