
चंडीगढ़: पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने नवांशहर में एक समयपूर्व जन्मी नवजात बच्ची की जान बचाकर एक मिसाल कायम की है। गर्भावस्था के महज 27वें सप्ताह में और जन्म के समय मात्र 700 ग्राम वजन वाली इस बच्ची ने 50 दिनों तक एनआईसीयू (NICU) में चली कड़ी जंग के बाद आखिरकार मौत को मात दे दी है। इस पूरे इलाज का खर्च योजना के तहत पूरी तरह कैशलेस रहा, जिस पर करीब 3 लाख रुपये की लागत आई।
नवांशहर के शिव शंकर मोहल्ला निवासी सूरज और उनकी पत्नी के घर 9 जून 2026 को जन्मी इस बच्ची के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे, जिसके कारण उसे गंभीर सांस संबंधी समस्याएं थीं। डॉक्टरों ने तुरंत उसे एक सूचीबद्ध निजी अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर और विशेष निगरानी में रखा। डॉ. हरतेश सिंह पाहवा और उनकी मेडिकल टीम की दिन-रात की मेहनत और राज्य सरकार की इस योजना ने परिवार को आर्थिक चिंताओं से पूरी तरह मुक्त रखा।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को अपने लाडले की जान बचाने और पैसे जुटाने के बीच समझौता न करना पड़े। आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के तहत अब तक राज्य में 4,400 से अधिक नवजातों को जीवनदान मिल चुका है, जिस पर 6.28 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। बच्ची के पिता सूरज ने सरकार और डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के सहयोग के बिना वे कभी इतना महंगा इलाज नहीं करा पाते।









