
नई दिल्ली। भारत ने एक और इतिहास रच देने वाली उड़ान अंतरिक्ष में भर दी है। चंद्रयान 3 भारत का परचम अंतरिक्ष में लहराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसी कड़ी में चंद्रयान-3 ने एक और लंबी छलांग लगा दी है। चंद्रयान 3 पृथ्वी की आखिरी कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-3 आज आखिरी बार धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। इसके बाद चंद्रयान-3 को सीधे चंद्रमा की ओर भेज दिया जाएगा। चंद्रयान-3 के 1 अगस्त की रात को चांद की ओर रवाना होने की उम्मीद है।
चंद्रयान-3 आज आखिरी बार धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। इसके बाद चंद्रयान-3 को सीधे चंद्रमा की ओर भेज दिया जाएगा। इसके बाद चंद्रयान-3 को 31 जुलाई या 01 अगस्त को चंद्रमा की ओर जाने वाले लंबे गैलेक्टिक हाइवे (Lunar Transfer Trajectory – LTT) पर डाल दिया जाएगा। चंद्रयान-3 को स्लिंगशॉट किया जाएगा। चंद्रयान-3 के 1 अगस्त की रात को चांद की ओर रवाना होने की उम्मीद है। फिर चांद की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू करेगा।
चंद्रयान-3 के चांद तक पहुंचने के लिए भी पांच मैनूवर होंगे। 23 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर लैंड करने की संभावना जताई जा रही है, इसके बाद चंद्रयान-3 धरती के चक्कर लगाता हुआ चंद्रमा के ऑर्बिट में एंट्री करेगा। लैंडर मॉड्यूल 23 अगस्त को चांद की सतह पर उतरेगा। लैंडर की असली चुनौती 23 अगस्त को है। विक्रम लैंडर के चारों पैरों की ताकत को बढ़ाया गया है। नए सेंसर्स,नया सोलर पैनल लगाया गया है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग का क्षेत्रफल 4 किलोमीटर x 2।5 किलोमीटर रखा गया है। यानी इतने बड़े इलाके में चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर उतर सकता है।









