chandrayaan-3 : इस तरह से चांद की धरती छू लेगा विक्रम लैंडर, आखिरी पल होंगे सबसे महत्वपूर्ण…

नई -नई वीडियो और तस्वीरें साझा कर रहा है. साथ ही ISRO विक्रम लैंडर के सही दिशा में लैंड करने की रणनीति पर भी ध्यान दे रहा है.

डिजिटल डेस्क- चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा है. ISRO का ड्रीम मिशन चंद्रयान-3 तेजी से चांद की ओर बढ़ा रहा है. ISRO लगातार चांद के करीब पहुंचने की नई -नई वीडियो और तस्वीरें साझा कर रहा है. साथ ही ISRO विक्रम लैंडर के सही दिशा में लैंड करने की रणनीति पर भी ध्यान दे रहा है.

लेकिन चंद्रयान-3 के लैंडिग का प्रोसेस क्या है ये हम आपको बताते हैं.लैंडर विक्रम की चांद से दूरी अब काफी कम रह गई है. ISRO ने लैंडिंग को लेकर पहले ही जानकारी दी है कि लैंडर,माड्यूल सॉफ्ट लैंडिंग से पहले महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया से होकर गुजरेगा. विक्रम लैंडर के अंदर ही बैठकर रोवर चांद के करीब चक्कर लगा रहा है.

बता दें कि चंद्रयान के प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग होने के बाद लैंडर मॉड्यूल विक्रम खुद ही आगे बढ़ रहा है और अब चांद से इसकी दूरी काफी कम बची है. ISRO ने कहा कि लैंडर मॉड्यूल में लैंडर विक्रम और रोवर हैं. रोवर प्रज्ञान, लैंडर विक्रम के साथ बैठकर चांद की करीबी कक्षा में चक्कर लगा रहा है.

बता दें कि इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों का मानना है कि लैंडर की अब महत्वपूर्ण बात चंद्रमा पर इसकी सुरक्षित लैंडिंग ही है.

लैंडर विक्रम की किस तरह होगी लैंडिंग ?

स्पेस वैज्ञानिक आर सी कपूर ने बताया कि चांद पर लैंडिंग के आखिरी 15 मिनट बेहद अहम होंगे.इसके बाद पहले स्टेप में ही जब चंद्रयान-3 लैंड करना शुरू करेगा तो उसकी स्पीड कम हो जाएगी.

बता दें कि 1683 मीटर प्रति सेकेंड की होगी.और उसी स्पीड पर उसे 7.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक उतारा जाएगा.इसके बाद से फिर लैंडर की स्पीड को घटाकर 375 मीटर प्रति सेकेंड किया जाएगा.यहां पर लैंडर विक्रम का ऑल्टिट्यूड होल्ड तय किया जाएगा.इसके बाद लैंडर को1300 मीटर की ऊंचाई तक लाया जाएगा.इसी हिसाब से चंद्रमा की सतह तक जाने की स्पीड धीरे धीरे कम होती रहेगी और लगातार स्पीड को कम किया जाएगा. फिर 400 मीटर, फिर 150 मीटर,फिर 50 मीटर तक लाया जाएगा. आखिरी में 10 मीटर पर आने के बाद फाइनल लैंडिंग होगी. फाइनली लैंडर की स्पीड 2 मीटर प्रति सेकेंड तक हो जाएगी.

एक रिपोर्ट के मुताबिक 23 अगस्त से चांद पर लूनार डे की शुरुआत हो जाएगी.जानकारी के लिए बता दें कि चांद पर एक लूनार दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. इन 14 दिनों तक चांद पर लगातार सूरज की रोशनी आती ही रहती है. चंद्रयान-3 में जो इंस्ट्रूमेंट लगे हैं उनकी लाइफ एक लूनार दिन की है. क्योंकि ये सोलर पावर से चलते हैं इसलिए इन्हें काम करने के लिए सूरज की रोशनी की जरूरत होगी ही.अगर किसी वजह से 23 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद पर लैंड नहीं कर पाता है तो अगले दिन फिर से कोशिश करेगा.

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