
SGPGI के कन्वेन्शन सेंटर में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन निरामया की शुरुआत की. कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सुसभ्य समाज को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य बहुत जरुरी होता है. इनके बिना किसी भी स्वस्थ समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा कि देश के अंदर यूपी और दुनिया के अंदर भारत कभी विश्व गुरु के रूप में स्थापित था. शैक्षिक रूपो से हम इतने स्व-उन्नत थे कि दुनिया भारत की और देखती थी और दुनिया के स्नातक उस समय भारत में अध्ययन के लिए आते थे. नालंदा, काशी, तक्षशिला और विक्रमशिला उस समय के शैक्षणिक संस्थानों के ज्वलंत उदहारण रहे.
सीएम योगी ने आगे कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी दुनिया की सबसे प्राचीनतम स्वास्थय पद्धतियों में भारत की स्वास्थ्य पद्धति है. लेकिन समय के साथ हम कहीं ना कहीं इसमें पिछड़े हैं. कारण है कि समय के अनुरूप हम अपने आप को नहीं लेकर चल पाए. हमने इसमें शोध की संभावनाओं को समय के साथ आगे नहीं बढ़ाया और परिणाम यह हुआ कि हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में धीरे-धीरे पिछड़ते गए, दुनिया हमसे बहुत आगे निकल गई और हम लकीर के फकीर बन गए. हमारी मजबूरी उनकी नकल करने की हो गई.
सीएम ने अपने संबोधन में आगे कहा कि साल 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने नए भारत के नए उत्तर प्रदेश के निर्माण को ध्यान में रखते हुए सभी क्षेत्रों में जिन कार्यक्रम को आगे बढ़ाया था उसमें ही एक कड़ी है मिशन निरामया. स्वास्थ्य के क्षेत्र की नर्सिंग और पैरामेडिकल को अगर जनविश्वास का प्रतीक बनाना है तो इसे भी बेहतर करने के लिए प्रयास करना होगा.
सीएम ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल का क्षेत्र उपेक्षित था. इसके बहुत कारण थे. लोग आज तक इस क्षेत्र को एक भ्रांतिपूर्ण नजरिए से देखते थे. लोग आज भी इसे उपेक्षा की दृष्टि से देखते थे. सीएम ने उदहारण देते हुए कहा कि एक चिकित्सक अधिक से अधिक एक मरीज को 2 या 4 मिनट में देखता है शेष उसकी देख-रेख के लिए पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ आज तक उपेक्षा का शिकार था.
सीएम ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल के कालेज आज तक उपेक्षित पड़े हुए थे. ना उनके पास इंफ्रास्ट्रक्चर था, ना फैकल्टी थी, ना लाइब्रेरी थी, ना प्रयोगशालाएं थी. ऐसे में आप उनसे गुणवत्ता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं. इसकी एक झलक हमें तब देखने को मिली जब हमने 4500 स्टाफ नर्सों की वांट निकाली, लोक सेवा आयोग को जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए और नियमों को सहज बनाया ताकि बड़ी संख्या में नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों को अवसर मिले.
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में लगभग 1 लाख से अधिक आवेदन पड़े और अन्तोगत्वा कुल 2200 पैरामेडिकल स्टाफ को नियुक्ति मिली. उन्होंने कहा कि ये संस्थानों की गुणवत्ता को दर्शाता है. जिन संस्थानों ने इस क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है उन्हें बेहतर सुविधाएं दी गई. ऐसे संस्थानों के लिए प्रदेश भर में रेटिंग की व्यवस्था की गई साथ ही इन्हें ग्रेडिंग देने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से भी जोड़ने की कार्रवाई की गई.
सीएम योगी ने कहा कि व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक नर्सिंग का फिल्ड एक ब्राइटफील्ड बना रहेगा. कोरोना काल खंड के दौरान भी नर्सिंग के क्षेत्र ने अपनी सेवाओं का बेहतरीन प्रदर्शन किया और इसलिए राज्य सरकार से लेकर भारत सरकार के स्वास्थ्य से जुड़े तमाम कार्यक्रमों में खास तौर नर्सिंग की छात्राओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर दिए गए.
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अगर हम समय के साथ खुद को बदलते हुए चलेंगे और बेहतरी के लिए प्रयासरत रहेंगे तो स्वाभाविक रूप से बेहतर परिणाम हमें देखने को मिलेंगे. सीएम योगी ने इस दौरान कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की रेटिंग क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए भी एक चुनौती हो इसके लिए हम सबको प्रयास करना होगा मिशन निरामया के अच्छा प्रयास है और मैं उम्मीद के साथ कह सकता हूं कि पहले चरण में ये रेटिंग राष्ट्रीय औसत के बराबर और WHO के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हम बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से हम बेहतर लक्ष्यों को नर्सिंग और पैरामेडिकल के क्षेत्र में देने सक्षम होंगे.









