
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को लोकसभा में नए एंटी-डिफेक्शन कानून (Anti-Defection Law) की जरूरत पर चर्चा के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने का प्रस्ताव दिया।
मनीष तिवारी ने अपने नोटिस में दिनभर के सूचीबद्ध कामकाज को रोककर नए कानून के स्वरूप पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राजनीतिक दल-बदल को रोकना होना चाहिए, जो अवसरवाद या बिना किसी वास्तविक वैचारिक और नीतिगत मतभेद के आधार पर किया जाता है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि नए कानून में संसद और विधानसभाओं के अंदर और बाहर ईमानदार व आलोचनात्मक असहमति के लिए भी जगह होनी चाहिए।
मनीष तिवारी के नोटिस में कहा गया कि सदन प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सूचीबद्ध कार्यों को स्थगित कर नए एंटी-डिफेक्शन कानून पर चर्चा करे, ताकि अवसरवाद के कारण होने वाले बड़े पैमाने पर राजनीतिक दल-बदल को रोका जा सके।
एंटी-डिफेक्शन कानून को संविधान में 1985 में 52वें संविधान संशोधन अधिनियम के जरिए जोड़ा गया था। यह कानून संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन सांसदों और विधायकों की अयोग्यता का प्रावधान करता है, जो पार्टी बदलते हैं।
वहीं, राज्यसभा में डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने नियम 267 के तहत कावेरी नदी विवाद को लेकर सदन के कामकाज को स्थगित करने का नोटिस दिया है।
तिरुचि शिवा ने कावेरी वाटर रेगुलेशन कमेटी (CWRC) के फैसले को लागू न करने और कर्नाटक सरकार की ओर से मेकेदातु में जलाशय बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की।
डीएमके सांसद ने कहा कि इस मुद्दे से तमिलनाडु के किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने मेकेदातु मामले के समाधान के लिए एक ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग भी की।
कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा अंतरराज्यीय नदी जल बंटवारे का विवाद है। यह विवाद खासतौर पर कम बारिश वाले वर्षों में पानी के बंटवारे को लेकर सामने आता है।









