
अयोध्या: रामलला की नगरी अयोध्या के स्थानीय साधु-संतों ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में राम मंदिर के दान और चढ़ावे में सामने आई कथित चोरी और अनियमितताओं के मामलों से आहत अयोध्या के प्रतिष्ठित संतों ने एकजुट होकर एक बड़ा संकल्प लिया है, जिसे “चंपत भगाओ, अयोध्या बचाओ” का नारा दिया गया है। संतों के इस आक्रामक रुख से मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
‘चंपत ने हमें दूर रखा और रामलला को भी नहीं छोड़ा’
अयोध्या में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान संतों ने चंपत राय और ट्रस्ट के कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। संतों ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में कहा, “चंपत राय ने सोची-समझी रणनीति के तहत हम अयोध्या के स्थानीय साधु-संतों को मंदिर के पवित्र कार्यों और प्रबंधन से पूरी तरह दूर रखा। हमें इस बात का बेहद दुख है, लेकिन हद तो तब हो गई जब इन लोगों ने खुद प्रभु रामलला को भी नहीं छोड़ा। आस्था के नाम पर देश-विदेश से आने वाले चढ़ावे और चंदे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।”
चोरी करने वाले देशद्रोही, तत्काल भंग हो ट्रस्ट: साधु-संत
राम मंदिर के धन के साथ खिलवाड़ करने वालों को संतों ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि माता सरयू के धाम में पाप करने वाले कभी सुखी नहीं रहेंगे। भगवान श्री राम के चरणों और चढ़ावे में चोरी करने वाले महापापी जल्द ही सरयू नदी के न्याय में समा जाएंगे।
संतों ने सरकार से सीधी मांग करते हुए कहा कि राम मंदिर के नाम पर संगठित लूट करने वाले ये लोग पूरी तरह से ‘देशद्रोही’ हैं, जिन्होंने करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। संतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए मांग की है कि वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए और इसकी जगह एक पारदर्शी व स्थानीय संतों की सहभागिता वाली नई व्यवस्था बनाई जाए। अयोध्या के संतों के इस खुले विद्रोह ने अब राम मंदिर विवाद को एक नया और बेहद गंभीर मोड़ दे दिया है।









