
कानपुर में सांसद, मंत्री और विधायकों के घरों के आसपास विकास की जमीनी तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। कहीं सड़कें खुदी हुई हैं, कहीं गड्ढे हैं, कहीं जलभराव और गंदगी की समस्या है तो कहीं वर्षों से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों के घरों के आसपास ही व्यवस्थाओं का यह हाल है, तो शहर के आम मोहल्लों की स्थिति कैसी होगी?
स्पीकर, सांसद, मेयर और बहुमत के विधायक बीजेपी से हैं, जबकि सपा के दो विधायक भी शहर से हैं। इसके बावजूद कानपुर की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शहर में आम आदमी से लेकर व्यापारी तक परेशान होने का दावा किया जा रहा है।
सांसद रमेश अवस्थी: “सांसद जी के घर तक पहुंचना ही वोटर्स के लिए बड़ी परीक्षा”
कानपुर में हजारों करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट और एलिवेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर की उम्मीदें दिखाई जा रही हैं, लेकिन सांसद रमेश अवस्थी के घर के बाहर ही सड़क लंबे समय से खुदी और निर्माणाधीन है। योजना का नाम ‘सीएम ग्रिड’ है।
सांसद के घर पर जनता की समस्याएं सुनने के लिए सेवा केंद्र बनाया गया है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता ही लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ऐसे में सवाल है कि जब सांसद के दरवाजे तक विकास नहीं पहुंच पाया तो बाकी शहर का क्या हाल होगा?
राकेश सचान, प्रतिभा शुक्ला और महेश त्रिवेदी: “दो मंत्री, एक विधायक का राज; 200 मीटर दूर दिखते हैं यमराज”
एक ही इलाके में दो मंत्री और एक विधायक हैं, लेकिन इनके घरों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर सड़क के गड्ढे व्यवस्था की तस्वीर दिखा रहे हैं। नामी स्कूल के बाहर से रोज हजारों बच्चे और अभिभावक गुजरते हैं।
गड्ढों के बीच वाहन संभालना किसी जोखिम से कम नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि तीन बड़े जनप्रतिनिधियों के इलाके में सड़क की यह स्थिति है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
नीलिमा कटियार: “विधायक जी के घर के पास विकास का कॉम्बो पैकेज”
कल्याणपुर के शारदा नगर में विधायक नीलिमा कटियार के घर के आसपास जलभराव, गंदगी और खराब सड़क की समस्याएं दिखाई दे रही हैं। रुके हुए पानी के कारण मच्छरों का खतरा भी बताया जा रहा है।
बारिश के बाद पानी भरने और उसके लंबे समय तक रुके रहने से मच्छरों की समस्या बढ़ने की बात कही जा रही है। यानी सड़क, नाली और सफाई की बदहाली का पूरा ‘कॉम्बो पैकेज’ दिखाई दे रहा है।
अमिताभ बाजपेयी: “धरने के लिए मशहूर विधायक, अपने घर के पास मजबूर”
अमिताभ बाजपेयी जनता के मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कुलवंती हॉस्पिटल के सामने की सड़क खुद एक मुद्दा बनी हुई है। गड्ढों के बीच बाइक और कार निकालना चुनौती बना हुआ है।
सवाल विधायक से भी है कि दूसरे मुद्दों पर धरना होता है तो अपने इलाके की इस सड़क के लिए कब होगा? विपक्ष में होने की दलील अपनी जगह, लेकिन जनता को आखिर सड़क कौन देगा?
अजीत पाल सिंह: “मंत्री जी का प्रमोशन हुआ, सड़क का नहीं”
काकादेव में कुछ ही दूरी पर मंत्री अजीत पाल सिंह का इलाका है। उन्हें राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार मिला। पद बढ़ा, जिम्मेदारी बढ़ी और राजनीतिक कद भी बढ़ा, लेकिन सड़क की हालत नहीं बदली।
मंत्री के घर के आसपास विकास की यह तस्वीर सरकार और नगर निगम दोनों से जवाब मांग रही है।
सुरेंद्र मैथानी: “जहां रहते हैं सुरेंद्र, वहां भी नरक का अहसास”
काकादेव में विधायक सुरेंद्र मैथानी के इलाके में मेट्रो निर्माण के कारण लंबे समय से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय-सीमा गुजरने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ और तीन साल से जनता धूल, जाम, खुदाई और अव्यवस्था के बीच इंतजार कर रही है।
सवाल यह है कि मेट्रो भविष्य की सुविधा है, लेकिन निर्माण के दौरान जनता की मौजूदा जिंदगी को आसान बनाने की जिम्मेदारी किसकी है?
कानपुर की सड़कों पर उठ रहे सवाल
कानपुर के अलग-अलग इलाकों में जनप्रतिनिधियों के घरों के आसपास सामने आ रही सड़क, जलभराव, सफाई और निर्माण से जुड़ी समस्याओं ने Kanpur Development और स्थानीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। Kanpur News में सामने आ रही यह तस्वीरें इस बात पर बहस छेड़ रही हैं कि बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ शहर की रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है।









