
लखनऊ। विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस ने इस प्रकरण में भवन की मालकिन रुचि अग्रवाल (पत्नी संदीप अग्रवाल, प्रोपराइटर हाइनेस इन्फ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड) को साइबर क्राइम थाने की ओर से नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर स्वामित्व, किराएदार की पहचान, रेंट एग्रीमेंट, पुलिस वेरिफिकेशन और एनओसी समेत सभी अहम दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया है। इस मामले में पुलिस अब तक 119 आरोपियों को गिरफ्तार कर अमेरिकी नागरिकों से हुई करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़ कर चुकी है।
नोटिस में क्या कहा गया?
धारा 179 बीएनएसएस के तहत जारी नोटिस में पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा न करने या तथ्य छुपाने की स्थिति में भवन मालकिन रुचि अग्रवाल को इस पूरे प्रकरण में सह-आरोपी मानते हुए बीएनएस धारा 208 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर हुई अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के दौरान भवन स्वामी की वास्तविक भूमिका क्या रही और क्या किराए पर जगह देने से पहले नियमानुसार सभी जरूरी सत्यापन और औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं।
पुराने धोखाधड़ी के आरोपी हैं अग्रवाल दंपति
जांच में सामने आया है कि अग्रवाल दंपति पहले से ही धोखाधड़ी के मामलों में लिप्त रहे हैं और इनके खिलाफ रोहतास के पीयूष रस्तोगी के पार्टनर के रूप में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और सीबीआई की जांच पहले से ही चल रही है। ऐसे में इस कॉल सेंटर कांड में इनकी संलिप्तता को लेकर जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।









