काशी में मां अन्नपूर्णा – सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से की मां अन्नपूर्णा के प्रतिमा की स्थापना

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में 108 साल बाद माँ अन्नपूर्णा की ऐतिहासिक प्रतिमा को मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। सोमवार को प्रतिमा का पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के उपरान्त प्राण-प्रतिष्ठा कर दी गयी। इस दौरान सीएम योगी समेत उनके मंत्रिमंडल के कई बड़े भाजपा नेता मौजूद रहे और पूरे धार्मिक अनुष्ठान की विधिवत प्रक्रिया के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माँ अन्नपूर्णा के मूर्ति की स्थापना की।

शनिवार को लखनऊ में पुजारियों द्वारा हाल ही में कनाडा से वापस लाई गई अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति का भजन-कीर्तन और पुष्पवर्षा के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में 15 नवंबर को अन्नपूर्णा देवी की प्रतिमा स्थापित की गयी। सीएम योगी समेत उनके मंत्रिमंडल के कई बड़े भाजपा नेता मौजूद रहे और पूरे धार्मिक अनुष्ठान की विधिवत प्रक्रिया के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माँ अन्नपूर्णा के मूर्ति की स्थापना की।

गुरुवार (11 नवंबर) को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने नई दिल्ली की नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (National Gallery Of Modern Art) में आयोजित एक समारोह में देवी की मूर्ति उत्तर प्रदेश (यूपी) के मंत्री सुरेश राणा को सौंपी गयी थी। यात्रा में योगी आदित्यनाथ सरकार के कई मंत्री शामिल हुए। कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति के साथ कानपुर से लखनऊ तक यात्रा की।

लखनऊ के सरोजिनीनगर में, स्थानीय भाजपा विधायक और यूपी की मंत्री स्वाति सिंह मूर्ति के गर्मजोशी से स्वागत के बाद जुलूस में शामिल हुईं। हजरतगंज में भाजपा के एक और वरिष्ठ मंत्री आशुतोष टंडन भी यात्रा में शामिल हुए थे। लखनऊ भाजपा नेता प्रवीण गर्ग ने कहा, “कानून मंत्री ब्रजेश पाठक यात्रा के लखनऊ चरण के साथ और प्रसाद बांटते भी देखे गए।”

सोमवार को कनाडा से मिली अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति अब वाराणसी में स्थापित की जा रही है। अन्नपूर्णा देवी की यह मूर्ति करीब 100 साल पहले चोरी हो गयी थी। सोमवार को पुरे विधि-विधान से मूर्ति की स्थापना वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में की गयी। बता दें कि अन्नपूर्णा मूर्ति की यह यात्रा दिल्ली से 11 नवंबर को अलीगढ़ के लिए रवाना हुई, जहां से 12 नवंबर को कन्नौज के लिए रवाना हुई थी। यात्रा लखनऊ के बाद यह अयोध्या के लिए रवाना हुई और अंतत: 15 नवंबर को वाराणसी पहुंची और विस्तृत अनुष्ठान के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया गया।

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