भारत और बौद्ध धरोहर के सशक्त कनेक्शन को बढ़ावा देते पीएम मोदी

उनका यह प्रयास यह सुनिश्चित करने का है कि भारत की बौद्ध धरोहर और शांति के विचार दुनिया भर में फैलें, और भारत को शांति और सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में स्थापित करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी समृद्ध बौद्ध धरोहर का लाभ उठाया है, जिससे वैश्विक कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक कूटनीति को नया आकार मिला है। पीएम मोदी की बौद्ध कूटनीति केवल सांस्कृतिक कनेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ही ठोस लाभ भी जुड़े हैं। उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय गौरव और आध्यात्मिक धरोहर का एक संतुलित मिश्रण है, जो भारत को न केवल बौद्ध देशों के लिए, बल्कि समग्र वैश्विक समुदाय के लिए एक “धम्म सेतु” के रूप में प्रस्तुत करता है।

थाईलैंड और श्रीलंका यात्रा में बौद्ध धरोहर का प्रचार

प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अप्रैल, 2025 को थाईलैंड और 4-6 अप्रैल, 2025 को श्रीलंका की यात्रा की, जो बौद्ध धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण यात्रा रही। थाईलैंड के वट फ्रा चेतुपोन विमोनमंगलाराम राचवोरमहाहविहान (वट फो) मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी ने सारनाथ शैली की बुद्ध की कांस्य मूर्ति भेंट की। इसके अलावा, उन्होंने 1960 में गुजरात के अरावली में मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के बारे में घोषणा की। श्रीलंका में, पीएम मोदी ने जया श्री महा बोधि मंदिर का दौरा किया और गुजरात से मिले देवनी मोरी अवशेषों को श्रीलंका भेजने की बात की।

भारत का वैश्विक शांति और बौद्ध धरोहर पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने बौद्ध धर्म की भूमिका को भारत की वैश्विक शांति पहल में प्रमुख रूप से उजागर किया। 2015 में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने कहा था, “बिना बुद्ध के, यह सदी एशिया की सदी नहीं बन सकती।” इसके अलावा, उन्होंने चीन, जापान और मंगोलिया में भी बौद्ध धरोहर को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण यात्राएं कीं।

भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास

प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक कनेक्शन का उदाहरण 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके बयान से मिलता है, जहां उन्होंने कहा, “भारत ने दुनिया को ‘बुद्ध’ दिया, ‘युद्ध’ नहीं।” इसके बाद, 2023 में आयोजित वैश्विक बौद्ध सम्मेलन में पीएम मोदी ने बौद्ध धर्म के विचारों को वैश्विक समस्याओं जैसे युद्ध, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।

निष्कर्ष: बौद्ध धर्म का वैश्विक संवाद में योगदान

प्रधानमंत्री मोदी का यह दृष्टिकोण, बौद्ध धर्म के विचारों को विश्व स्तर पर फैलाने का, भारत की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उनका यह प्रयास यह सुनिश्चित करने का है कि भारत की बौद्ध धरोहर और शांति के विचार दुनिया भर में फैलें, और भारत को शांति और सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में स्थापित करें।

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