
भारत की बैडमिंटन टीमों को एशियन गेम्स 2026 और आगामी ओलंपिक 2028 की तैयारियों में मजबूती देने के लिए स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स (MYAS) द्वारा समर्थित नेशनल कोचिंग कैंप महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। करीब 1.67 करोड़ रुपये की मंजूरी से देश के तीन प्रमुख शहरों—हैदराबाद, बेंगलुरु और गुवाहाटी में हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग कैंप शुरू किए गए हैं।
ये कैंप 10 अप्रैल से शुरू हुए और 30 जून तक चलेंगे। इनका उद्देश्य देश के शीर्ष शटलरों को एक साथ लाकर उनकी तकनीक, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को मजबूत करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
हाल ही में डेनमार्क के हॉर्सेंस में आयोजित थॉमस और उबर कप 2026 में भारतीय पुरुष टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इस सफलता के बाद इन कैंपों का महत्व और बढ़ गया है।
इन ट्रेनिंग सेंटरों में लक्ष्य सेन, किदांबी श्रीकांत, आयुष शेट्टी, और स्टार डबल्स जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। वहीं महिला वर्ग में पीवी सिंधु, ट्रीसा जॉली और तनीषा क्रैस्टो जैसी खिलाड़ी भी कैंप का हिस्सा हैं।
हैदराबाद के पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी, बेंगलुरु के सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस और गुवाहाटी स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चल रहे इन कैंपों में कुल 30 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इन कैंपों में विदेशी कोच, फिजियो, ट्रेनर और एनालिस्ट की भी सहायता ली जा रही है, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल मिल सके। लक्ष्य सिर्फ एशियन गेम्स ही नहीं बल्कि ओलंपिक 2028 और अन्य बड़े टूर्नामेंट भी हैं।
यह पहल भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।









