
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। इस बार भारत सरकार के एक पूर्व गृह सचिव द्वारा चढ़ाई गई एक किलो शुद्ध सोने की प्राचीन रामायण (रामचरितमानस) के गायब होने और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा उनके अपमान का बेहद गंभीर आरोप लगा है।
पूर्व गृह सचिव की सोने की रामायण का नहीं मिल रहा हिसाब
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच अब एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। आरोप है कि भारत सरकार के एक पूर्व गृह सचिव द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ रामलला को भेंट की गई एक किलो शुद्ध सोने की रामचरितमानस का भी कोई स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि पूर्व गृह सचिव ने यह कीमती और ऐतिहासिक धार्मिक भेंट ट्रस्ट को सौंपी थी, लेकिन उन्हें न तो इसके बदले कोई रसीद दी गई और न ही बाद में इस बात की कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई कि यह बहुमूल्य भेंट आखिर कहां सुरक्षित रखी गई है।
चंपत राय पर घंटों इंतजार कराने और अपमानित करने का आरोप
इस पूरे मामले में लूट के आरोपों के साथ-साथ रसूखदार श्रद्धालुओं के तिरस्कार और अपमान का भी बड़ा उदाहरण सामने आया है। पीड़ितों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि जब पूर्व गृह सचिव ने चंपत राय से मुलाकात करने और अपनी भेंट की जानकारी लेने की कोशिश की, तो चंपत राय ने उन्हें पहली बार करीब 9 घंटे और दूसरी बार करीब 4 घंटे तक इंतजार कराया। मांगने पर रसीद देने के बजाय उन्हें बेइज्जत भी किया गया। यह घटना दिखाती है कि कैसे ट्रस्ट से जुड़े लोग आम और खास रामभक्तों की आस्था को अपमानित कर रहे थे।
व्यवस्था और रिकॉर्ड की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इस नए खुलासे के बाद अब व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि जब भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव जैसे उच्च पदस्थ व्यक्ति द्वारा चढ़ाई गई एक किलो सोने की रामचरितमानस का हिसाब साफ नहीं है और उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है, तो देश-विदेश के आम रामभक्तों द्वारा श्रद्धा से दिए गए चढ़ावे और दान का रिकॉर्ड कितना सुरक्षित रहा होगा? इस मामले के सामने आने के बाद राम मंदिर में कामकाज और चढ़ावे की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था कटघरे में है।









