
लखनऊ। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के 29वें दीक्षांत समारोह में सीतापुर जिले की सिद्धौली तहसील के भेड़िया गांव की रहने वाली प्रभा चंद्रा ने चार गोल्ड मेडल हासिल कर अपने परिवार और पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। खास बात यह है कि प्रभा के पिता किसान हैं और दूसरों के खेतों में मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं, लेकिन बेटी ने पढ़ाई में जो मुकाम हासिल किया, उसने हर किसी का दिल जीत लिया।
संघर्ष भरी रही प्रभा की राह
प्रभा ने बताया कि करीब दस साल पहले पढ़ाई के लिए उन्हें गांव छोड़ना पड़ा था। परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि शिक्षा का सफर आसान हो, लेकिन माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई के लिए हर तरह का त्याग किया। उन्होंने अमेठी के सेटेलाइट सेंटर से डिप्लोमा करने के बाद बीबीएयू से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2024 में बीए में टॉप करने के बाद अब 2026 में एमए (इतिहास) में एससी वर्ग में सर्वोच्च स्थान हासिल कर चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें आरडी सोनकर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया।
पूरा परिवार शिक्षा के क्षेत्र में आगे
प्रभा के साथ ही उनके भाई-बहन भी शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। एक भाई एमएससी कर रहा है, जबकि बहन एमएससी पूरी कर नौकरी की तैयारी में जुटी है। पांचों भाई-बहनों ने मिलकर यह साबित कर दिखाया है कि संसाधनों की कमी कभी भी सपनों के आड़े नहीं आती। प्रभा ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता के संघर्ष और उनके त्याग को दिया है।









