1 करोड़ खर्च, यूनिवर्सिटी में टॉप, फिर भी 500 बार मिली रिजेक्शन, इस छात्र की कहानी ने सबको चौंकाया

ब्रिटेन से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा और रोजगार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 साल के खालिद शरीफ ने लंदन की...

ब्रिटेन से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा और रोजगार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 साल के खालिद शरीफ ने लंदन की किंग्स्टन यूनिवर्सिटी से ‘डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजी’ में डिग्री हासिल की। खालिद ने न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि 2025 में अपनी क्लास में टॉप भी किया। लेकिन हकीकत यह है कि टॉपर होने के बावजूद वह आज भी एक अदद पक्की नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

500 आवेदन और 1.04 करोड़ का निवेश

खालिद की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने अपनी शिक्षा पर करीब 1 लाख पाउंड (लगभग 1.04 करोड़ रुपये) खर्च किए। इतनी भारी-भरकम राशि खर्च करने के बाद उन्होंने अब तक 500 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा। खालिद के मुताबिक, 500 आवेदनों में से उन्हें केवल 20 इंटरव्यू कॉल आए, लेकिन किसी भी कंपनी ने उन्हें ऑफर लेटर नहीं दिया।

“मैंने अपनी क्लास में टॉप किया, लेकिन फिर भी खाली हाथ हूँ। अगर टॉपर के साथ यह हो रहा है, तो कम नंबर लाने वाले छात्रों का क्या हाल होगा?” — खालिद शरीफ

क्यों बंद हो रहे हैं नौकरी के दरवाजे?

खालिद ने मौजूदा जॉब मार्केट की मुश्किलों के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए हैं:

  • AI का बढ़ता असर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से एंट्री-लेवल की कई नौकरियां खत्म हो रही हैं।
  • महामारी का प्रभाव: कोरोना के बाद कंपनियां नई भर्तियों में कटौती कर रही हैं और खर्च बचाने की कोशिश में हैं।
  • वीजा और बैकग्राउंड: मूल रूप से मिस्र के रहने वाले और कतर में पढ़े खालिद को लगता है कि उनके इंटरनेशनल बैकग्राउंड की वजह से कंपनियां कतरा रही हैं। कंपनियों को लगता है कि उन्हें वीजा स्पॉन्सरशिप चाहिए होगी, जबकि उनके पास ब्रिटेन में काम करने की पूरी अनुमति है।

संघर्ष के बीच खुद का रास्ता बनाया

निराशा के इस दौर में भी खालिद ने हार नहीं मानी है। फुल-टाइम जॉब न मिलने पर उन्होंने फ्रीलांस वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी शुरू की है। इसके साथ ही उन्होंने ‘Zoque’ नाम से अपना खुद का कपड़ों का ब्रांड भी लॉन्च किया है, जहाँ वह अपने फैशन और क्रिएटिव हुनर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिस्टम पर उठे सवाल

खालिद का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब डिग्रियों की अहमियत खत्म हो गई है? यूजर्स का कहना है कि अगर एक टॉपर को 1 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था और वर्तमान सिस्टम की विफलता है। यह कहानी अब एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संघर्ष कर रहे लाखों युवाओं की आवाज बन गई है।

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