
मुंबई : देश के सबसे भरोसेमंद और सम्मानित कारोबारी समूहों में गिने जाने वाले टाटा ग्रुप में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उठापटक जारी है। टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) का बिना कोरम पूरा हुए स्थगित होना इस पूरे घटनाक्रम की सबसे ताज़ा और सबसे चौंकाने वाली कड़ी है। आइए समझते हैं कि टाटा ग्रुप में आखिर मामला क्या है।
1. पहली बार टाटा संस की बैठक बिना कोरम पूरा हुए टली
18 अगस्त को हुई टाटा संस की AGM सौ साल से ज्यादा के इतिहास में पहली बार जरूरी कोरम पूरा न होने की वजह से स्थगित करनी पड़ी। कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार बैठक में कम से कम पांच सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है, जिसमें सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित एक प्रतिनिधि भी शामिल होना चाहिए क्योंकि ये दोनों ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में करीब 51.5% हिस्सेदारी रखते हैं।
समस्या यह रही कि SRTT अपनी बोर्ड बैठक ही नहीं बुला पाया, इसलिए वह कोई प्रतिनिधि नामित नहीं कर सका और कोरम पूरा नहीं हो पाया।
2. जड़ में है ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने SRTT को कोई भी बड़ा फैसला लेने या बैठक बुलाने से रोक रखा है। इसकी वजह महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A(2) है, जिसे 2025 में संशोधित किया गया था। इस संशोधन के मुताबिक किसी भी ट्रस्ट के बोर्ड में आजीवन (लाइफटाइम) ट्रस्टियों की संख्या कुल बोर्ड का 25% से ज्यादा नहीं हो सकती।
एक याचिका में आरोप लगाया गया कि SRTT के छह ट्रस्टियों में से तीन जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा आजीवन ट्रस्टी हैं, यानी बोर्ड का 50%, जो तय सीमा से दोगुना है।
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि यह संशोधन आगे से (prospectively) लागू होना चाहिए और 1 सितंबर 2025 से पहले की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं होता। उन्होंने चैरिटी कमिश्नर के मई के आदेश को एकपक्षीय (ex parte) भी बताया है।
समाधान का एक रास्ता यह हो सकता है कि आजीवन ट्रस्टी अपना दर्जा छोड़कर संशोधित कानून के मुताबिक निश्चित अवधि के लिए दोबारा नियुक्त हों।
3. चंद्रशेखरन ने इस्तीफा नहीं दिया, अगला कार्यकाल नहीं लेने का फैसला किया
यह साफ करना जरूरी है एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने सिर्फ यह फैसला किया है कि फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे। तब तक वे चेयरमैन और डायरेक्टर बने रहेंगे। इस बीच टाटा ट्रस्ट्स ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक चयन पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन SRTT के मौजूदा संकट ने इस प्रक्रिया को भी उलझा दिया है।
इसी बीच टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन विजय सिंह ने भी SRTT ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि 14 अगस्त को उनका कार्यकाल पूरा हो गया था यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ जब SRTT का बोर्ड पहले से ही ठप पड़ा है।
4. आगे क्या होगा?
बैठक स्थगित होने से टाटा संस के FY26 के वित्तीय नतीजों की मंजूरी, डिविडेंड का ऐलान और चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप जैसे अहम मुद्दे अटक गए हैं। जब तक कोरम पूरा करते हुए एक वैध AGM नहीं होती, चंद्रशेखरन डायरेक्टर बने रहेंगे।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि टाटा संस के बोर्डरूम में उठापटक से ज्यादा असली मसला ट्रस्ट स्तर के गवर्नेंस और कानूनी पेचीदगियों का है जो अब देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की एक सामान्य सी दिखने वाली सालाना बैठक को भी उलझा रहा है।









