
नई दिल्ली: दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर देश की राजनीति का केंद्र बन गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में आज INDIA गठबंधन यहां विशाल महारैली के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर जोर देना है।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के बहाने योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाकर वोट चोरी का रास्ता साफ किया जा रहा है। वहीं, चुनाव आयोग विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR को मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की सामान्य कानूनी प्रक्रिया बता रहा है। इस राजनीतिक टकराव के बीच रामलीला मैदान की क्षमता और रैली की व्यवस्थाओं पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
12 एकड़ में फैला है ऐतिहासिक रामलीला मैदान
दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान करीब 12 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
मीडिया रिपोर्ट और नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे मैदान को एक दिन के लिए बुक कराने का शुल्क करीब 1.21 लाख रुपये है। इस राशि में सरकारी टैक्स और रिफंडेबल सिक्योरिटी भी शामिल होती है। कार्यक्रम के शांतिपूर्ण समापन के बाद निर्धारित शर्तों के अनुसार सिक्योरिटी राशि आयोजकों को वापस कर दी जाती है।
रामलीला मैदान में कितने लोग हो सकते हैं शामिल?
रामलीला मैदान की वास्तविक क्षमता कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर निर्भर करती है। जब मैदान पूरी तरह खाली रहता है, तब यहां एक साथ करीब 45 हजार से 50 हजार लोग पहुंच सकते हैं।
हालांकि, बड़ी राजनीतिक रैली के दौरान मंच, VIP लाउंज, साउंड सिस्टम, बैरिकेडिंग और कुर्सियों के इंतजाम के चलते उपलब्ध जगह कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में मैदान के मुख्य हिस्से में करीब 30 हजार से 40 हजार लोग ही व्यवस्थित तरीके से बैठ या खड़े हो सकते हैं।
राहुल गांधी की महारैली में कितनी भीड़ जुटने का दावा?
राहुल गांधी की इस महारैली में विपक्षी नेताओं की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, भीड़ की वास्तविक संख्या का आकलन सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के आधार पर किया जाता है।
दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के व्यावहारिक आकलन के मुताबिक, पूरे परिसर और आसपास के रास्तों को मिलाकर करीब 40 हजार से 50 हजार लोगों की भीड़ को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने की व्यवस्था को ध्यान में रखा जाता है।
सुरक्षा के लिए बनाए गए 14 जोन
महारैली के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति और भगदड़ जैसी आशंका को रोकने के लिए मैदान को कुल 14 अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है।
प्रत्येक जोन में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई है। यदि मैदान की निर्धारित क्षमता से अधिक लोग पहुंचते हैं, तो प्रशासन की ओर से मैदान के बाहर की सड़कों और आसपास की खुली जगहों पर अतिरिक्त होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मिला समर्थन
इस आंदोलन को CJP के अभिजीत दीपके जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी नैतिक समर्थन दिया है। हालांकि, वह इस रैली में शामिल नहीं हो रहे हैं।
रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की इस महारैली के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी एकजुटता दिखा रहा है।









