
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। मिर्जापुर जिले से जुड़े इस मामले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस में अनुकंपा/आश्रित कोटे के तहत अवैध रूप से नौकरी हासिल करने के आरोप में एक महिला समेत 8 पुलिस रिक्रूटों (रंगरूटों) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग की आंतरिक जांच में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासनिक महकमे और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी आरोपियों ने सरकारी नियमों और कोटे का गलत फायदा उठाने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी आश्रित दस्तावेज तैयार करवाए और उन्हें भर्ती प्रक्रिया के दौरान असली के रूप में इस्तेमाल किया। इस हाई-प्रोफाइल जालसाजी मामले में नामजद आरोपियों की पहचान खुशबू गुप्ता (महिला रिक्रूट), अभिषेक पांडेय, शुभम दुबे, रविशंकर, प्रदीप कुमार, अजय कुमार, आकाश मिश्रा और दिव्यांशु यादव के रूप में हुई है। इन सभी ने धोखाधड़ी से पुलिस विभाग की वर्दी हासिल कर ली थी, लेकिन वेरिफिकेशन के दौरान इनका झूठ पकड़ा गया।
दस्तावेजों के सत्यापन और शुरुआती जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में सभी 8 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह न केवल एक बड़ा वित्तीय और सेवा संबंधी अपराध है, बल्कि देश के वास्तविक स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के हक पर डाका डालने जैसा कृत्य है। पुलिस प्रशासन अब इन सभी रिक्रूटों को बर्खास्त करने की विधिक कार्रवाई के साथ-साथ इस गिरोह के पीछे छिपे मुख्य सरगनाओं और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले रैकेट की तलाश में जुट गया है।









