
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में महान योद्धा महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
राजनाथ सिंह ने बताया कि जब 2014 में केंद्र में मौजूदा सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत का रक्षा निर्यात केवल 600 करोड़ रुपये के आसपास था। लेकिन अब यह बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह निर्यात 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
राजनाथ सिंह ने कहा,“यह सिर्फ एक लक्ष्य नहीं है, बल्कि हमारा संकल्प है। हम इसे हासिल करके दिखाएंगे। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए हमने कई अहम कदम उठाए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले रक्षा कंपनियां दुनियाभर में फैली सप्लाई चेन पर निर्भर थीं, लेकिन अब भारत इन चुनौतियों को समझते हुए घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि “जब मैंने समृद्धि महामार्ग बनाने का फैसला लिया था, तब कहा करता था कि पुणे महाराष्ट्र का औद्योगिक केंद्र है, लेकिन अब यह केंद्र छत्रपति संभाजीनगर और जलना की ओर शिफ्ट होगा।” उन्होंने बताया कि अब जब भी कोई उद्योगपति संभाजीनगर आता है, तो यहां निवेश करता है, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
भविष्य की तैयारी में जुटी सरकार
गुरुवार को एक अन्य कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा था कि व्यापार प्रतिबंध, टैरिफ युद्ध, और विदेशी आपूर्ति पर अधिक निर्भरता से उत्पन्न जोखिम अब दुनिया के सामने आ चुके हैं। दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में रक्षा अधिकारियों और निजी रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार किया जाए।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘जस्ट इन टाइम’ जैसी रणनीतियों के नुकसान अब सामने आ रहे हैं और भारत को अब ऐसी नीतियों की ओर बढ़ना है जो स्थिरता, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में देश की सांस्कृतिक विरासत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया।









