36 साल बाद कहाँ हैं ‘अंजलि’ फिल्म की चाइल्ड आर्टिस्ट बेबी शामिली? जानिए अब क्या करती हैं…

साल 1990 की मणिरत्नम की फिल्म 'अंजलि' की चाइल्ड आर्टिस्ट बेबी शामिली अब कहाँ हैं? जानिए नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली इस अभिनेत्री की पूरी कहानी और मौजूदा जिंदगी के बारे में।

भारतीय सिनेमा में कई ऐसे बेहतरीन कलाकार हुए हैं जिन्होंने बचपन में ही अपनी शानदार अदाकारी से इतिहास रच दिया, लेकिन बाद में उन्होंने चकाचौंध भरी दुनिया से दूरी बना ली। ऐसी ही एक चर्चित चाइल्ड आर्टिस्ट थीं शामली (जिन्हें ‘बेबी शामिली’ के नाम से भी जाना जाता है)। उन्होंने महज 4 साल की उम्र में अपनी क्यूटनेस और बेहतरीन एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया था और इसके लिए उन्हें बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

साल 1990 में आई सुपरहिट फिल्म ‘अंजलि’ में मुख्य भूमिका निभाने वाली शामली ने अपने शुरुआती करियर में ही साउथ सिनेमा के दिग्गज कलाकारों जैसे मोहनलाल और ममूटी के साथ काम किया था। फिल्म इंडस्ट्री में इतनी कम उम्र में अपार शोहरत हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई और पर्सनल लाइफ पर ध्यान देने के लिए लाइमलाइट से किनारा कर लिया।

अब कहां हैं और क्या करती हैं शामली?

अंजलि फिल्म में उस चुलबुली बच्ची का किरदार निभाने वाली शामली अब 39 साल की हो चुकी हैं। सिंगापुर में अपनी पढ़ाई और करियर पर लंबा ब्रेक लेने के बाद उन्होंने साल 2009 में फिल्म ‘ओय!’ से बतौर लीड एक्ट्रेस वापसी की थी। इसके बाद वह साल 2016 में विक्रम प्रभु के साथ फिल्म ‘वीरा शिवाजी’ में भी नजर आईं। हालांकि, फिल्मों में धीरे-धीरे सक्रियता कम होने के बाद वह बड़े पर्दे से पूरी तरह दूर हो गईं।

फिलहाल, फिल्मों से दूर शामली सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी बनाई गई खूबसूरत पेंटिंग्स (Paintings) शेयर करती रहती हैं, जिन्हें उनके फैंस बेहद पसंद करते हैं और उनकी कला की तारीफ करते हैं।

क्या थी फिल्म ‘अंजलि’ की कहानी?

मशहूर निर्देशक मणिरत्नम द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘अंजलि’ 12 जुलाई 1990 को रिलीज हुई एक क्लासिक तमिल ड्रामा फिल्म थी। इस फिल्म में रघुवरन और रेवती मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि तरुण, श्रुति और शामिली ने अहम किरदार निभाए थे। यह कहानी एक ऐसे माता-पिता (शेखर और चित्रा) की थी जिनकी तीसरी संतान अंजलि (शामली) गंभीर रूप से बीमार और मानसिक रूप से दिव्यांग थी। परिवार और समाज के संघर्षों पर बनी इस संवेदनशील फिल्म ने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे। इतना ही नहीं, साल 1991 में इस फिल्म को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक (Official) एंट्री के रूप में भी भेजा गया था, हालांकि इसे नॉमिनेशन नहीं मिल पाया था।

Related Articles

Back to top button