‘बिना TET पास किए नहीं चलेगी नौकरी’, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका खारिज की; समयसीमा एक साल बढ़ी, अब 31 अगस्त 2028 तक मौका

बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोपरि, इसके बाद कोई और समय विस्तार नहीं मिलेगा; पाँच राज्यों के शिक्षक संगठनों को बड़ा झटका - कोर्ट

नई दिल्ली। देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले हर शिक्षक को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास करना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने इस नियम में ढील देने से साफ इनकार कर दिया है, हालाँकि परीक्षा पास करने की समयसीमा एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी गई है। साथ ही यह चेतावनी भी जारी कर दी गई कि अब और कोई मोहलत नहीं दी जाएगी।

क्या था पिछला ऐतिहासिक आदेश?

एक सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसने पूरे शिक्षा जगत में हलचल मचा दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने आदेश दिया था कि वे सभी शिक्षक, जो बिना TET पास किए नौकरी कर रहे हैं और जिनकी सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष से अधिक का समय बचा है, उन्हें दो साल के भीतर यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। ऐसा न करने पर उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। जिन शिक्षकों की सेवा पाँच साल से कम बची थी, उनके लिए TET पास करने की बाध्यता नहीं रखी गई थी, लेकिन पदोन्नति चाहिए तो उन्हें भी यह योग्यता हासिल करनी होगी।

RTE एक्ट की व्याख्या ही बनी आधार

कोर्ट ने अपने इस कड़े रुख के पीछे शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act), 2009 का हवाला दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 29 जुलाई, 2011 को ही शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर दी थी। कानूनन, बिना इस न्यूनतम योग्यता के कोई भी व्यक्ति प्राथमिक या उच्च प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने का पात्र नहीं है। अब एक बार फिर कोर्ट ने इन्हीं संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को आधार बनाकर अपने पुराने फैसले को बदलने से इनकार कर दिया।

शिक्षक संगठनों की दलील खारिज, सिर्फ एक साल की राहत

पिछले साल के इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के शिक्षक संगठनों के साथ-साथ कुछ राज्य सरकारों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इन याचिकाओं में प्रमुख माँग यह थी कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति RTE Act लागू होने से पहले ही हो चुकी थी, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया। हालाँकि, गैर-TET शिक्षकों की भारी तादाद और कई राज्यों में परीक्षा आयोजन की धीमी रफ्तार को देखते हुए कोर्ट ने पहले तय की गई समयसीमा को एक साल के लिए बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा, “इसके बाद और कोई समय विस्तार नहीं दिया जाएगा।”

‘नौकरी बचाने तक सीमित न रहें शिक्षक, बच्चों का भविष्य पहले’

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों से सीधे संवाद करते हुए एक भावुक अपील भी की। पीठ ने कहा, “शिक्षक सिर्फ अपनी नौकरी बचाने तक ही सीमित न रहें। उन्हें समझना चाहिए कि किसी भी राष्ट्र के भविष्य की नींव उसके बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर टिकी होती है और उसके लिए एक योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षक का कक्षा में होना पहली और अनिवार्य शर्त है।” यह आदेश अब देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों पर लागू होगा।

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