भारत के पास 250 मिलियन बैरल तेल का विशाल भंडार, 7-8 हफ्तों तक देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की क्षमता

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर हाल ही में जारी एक सरकारी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के पास वर्तमान समय में 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त ऊर्जा भंडार मौजूद है। यह भंडार लगभग 4,000 करोड़ लीटर तेल के बराबर बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्टॉक देश की पूरी सप्लाई चेन को लगभग सात से आठ हफ्तों तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। इस जानकारी के सामने आने के बाद उन दावों को गलत बताया गया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत के पास केवल 25 दिनों का ही तेल भंडार है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने रणनीतिक तेल भंडार को कई सुरक्षित स्थानों पर तैयार किया है। इनमें कर्नाटक के मैंगलोर और पादुर तथा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बने भूमिगत भंडार शामिल हैं। इन स्थानों पर जमीन के नीचे विशेष रूप से बनाई गई विशाल गुफाओं में तेल स्टोर किया जाता है। इसके अलावा जमीन के ऊपर बने टैंकों, पाइपलाइनों और समुद्र में खड़े तेल जहाजों में भी पेट्रोलियम उत्पादों का भंडारण किया जाता है। इस बहुस्तरीय व्यवस्था के कारण आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की ऊर्जा खरीद नीति पिछले एक दशक में काफी मजबूत और विविधतापूर्ण हुई है। पहले भारत लगभग 27 देशों से तेल आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 40 देशों तक पहुंच चुकी है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर नहीं रही है। दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, लेकिन भारत का केवल लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल ही इस मार्ग से होकर आता है। शेष 60 प्रतिशत तेल रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से दूसरे सुरक्षित रास्तों के जरिए भारत पहुंचता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। यदि किसी एक मार्ग में व्यवधान भी आता है तो अन्य स्रोतों और रास्तों के माध्यम से आपूर्ति को संतुलित किया जा सकता है। इसे रिपोर्ट में “मैनेज्ड सोर्सिंग एडजस्टमेंट” बताया गया है, न कि किसी प्रकार की आपूर्ति आपात स्थिति।

फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल खरीद के लिए किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भरता नहीं रखी है। साथ ही भारत ने जी-7 देशों द्वारा तय किए गए प्राइस कैप से जुड़े सभी नियमों का पालन किया है।

हाल ही में अमेरिका के ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई 30 दिनों की छूट को भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण बताया गया है। इससे भारत को रूसी तेल की खरीद जारी रखने में सुविधा मिली है और वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका को भी मान्यता मिली है।

घरेलू स्तर पर भी भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं। देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम लागू किया गया है, जिससे हर साल लगभग 44 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत कम हो रही है। इसके अलावा भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंच गई है, जबकि देश की कुल खपत 210 से 230 मिलियन मीट्रिक टन के बीच है। इसका मतलब है कि भारत अपनी जरूरत से अधिक रिफाइनिंग क्षमता रखता है।

इस मजबूत ढांचे की वजह से भारतीय रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंधों के बाद यूरोप में ईंधन की कमी को पूरा करने में भी भारतीय रिफाइनरियों ने योगदान दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिफाइनर किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहते और यह लचीलापन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें पिछले चार वर्षों से अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में लगभग 0.67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके विपरीत पाकिस्तान में इसी अवधि में कीमतों में 55 प्रतिशत और जर्मनी में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी बड़ा आर्थिक बोझ उठाया है। पेट्रोल और डीजल पर लगभग 24,500 करोड़ रुपये तथा एलपीजी पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान सहा गया। रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य आधार किफायतीपन, उपलब्धता और स्थिरता है, और पिछले बारह वर्षों में देश में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी की स्थिति नहीं आई है।

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