
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने हाल ही में न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (EDNY) द्वारा U.S. डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के क्रिमिनल केस को खारिज किए जाने के बाद एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया है। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच, उन्होंने ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ के दूसरे संस्करण में लीडरशिप, भरोसे और लंबे समय तक चलने वाले संस्थानों के निर्माण पर अपने विचार रखे।
हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों और उसके बाद कानूनी चुनौतियों का सामना करने के अपने अनुभव को याद करते हुए श्री अडानी ने कहा कि इस दौर ने उन्हें जीत के बजाय विनम्रता दी है और कानून के राज में उनका विश्वास और मजबूत किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली चरित्र दबाव में ही निखरता है। उन्होंने अपने 20,000 करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) को वापस लेने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि “भरोसा किसी भी कानूनी हक से बड़ा है।” मूल्य और नैतिकता हमेशा कानूनी अधिकारों से ऊपर होते हैं।
तीन लाख से अधिक कर्मचारियों और पार्टनर्स वाले ‘अडानी परिवार’ को संबोधित करते हुए उन्होंने अपील की कि ऐसे इंस्टीट्यूशन बनाए जाएं जो ईमानदारी, मजबूती और देश सेवा पर आधारित हों। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ रहा है, हर किसी को यह सोचना चाहिए कि उनकी पीढ़ी को किन अच्छे कामों के लिए याद किया जाएगा। यह संबोधन अडानी ग्रुप के संघर्ष, मजबूती और भविष्य के विजन को स्पष्ट रूप से बयां करता है।









