इज़राइल ने IRGC की अहम ठिकानों पर किया हमला, स्पेस फ़ोर्स हेडक्वार्टर भी निशाने पर…

इज़राइल डिफ़ेंस फ़ोर्स (IDF) ने रविवार को तेहरान में एक और मिलिट्री हमले की लहर शुरू की, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख इंफ़्रास्ट्रक्चर और ईरानी सरकार के सुरक्षा तंत्र के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाया गया।

इज़राइल डिफ़ेंस फ़ोर्स (IDF) ने रविवार को तेहरान में एक और मिलिट्री हमले की लहर शुरू की, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख इंफ़्रास्ट्रक्चर और ईरानी सरकार के सुरक्षा तंत्र के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाया गया।

बता दें, IDF ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी एक बयान में कहा कि इस ऑपरेशन में IRGC के स्पेस फ़ोर्स हेडक्वार्टर समेत लगभग 50 एम्युनिशन बंकर, एक बासिज बेस, एक इंटरनल सिक्योरिटी कमांड सेंटर और IRGC के ग्राउंड फ़ोर्स से जुड़े एक कंपाउंड को नष्ट किया गया।

बयान में कहा, “IDF ने ईरानी आतंकी सरकार के इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हमला किया। इनमें 50 बंकर शामिल थे, जो इंटरनल सिक्योरिटी बेस में ईरानी सरकार के एम्युनिशन स्टोर करते थे।” IRGC स्पेस फ़ोर्स हेडक्वार्टर ईरानी स्पेस एजेंसी से जुड़े एक कमांड, रिसर्च और ट्रांसमिशन सेंटर के रूप में काम करता था, जो सरकार के मिलिट्री स्ट्रक्चर के तहत था।

वहीं, IDF ने बताया कि इस साइट पर “खय्याम” सैटेलाइट के लिए एक कमांड-एंड-कंट्रोल फ्रेमवर्क भी था, जिसे अगस्त 2022 में लॉन्च किया गया था और कथित तौर पर IRGC ने इसका इस्तेमाल इज़राइल के खिलाफ गतिविधियों में किया, जिसमें इंटेलिजेंस इकट्ठा करना भी शामिल था।

IDF ने आगे कहा कि वह ईरानी आतंकी शासन के सिस्टम और इंफ़्रास्ट्रक्चर को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं और इसे और बढ़ाने की योजना है।

बासिज और इंटरनल सिक्योरिटी फोर्स, जो ईरान की आर्म्ड फोर्स का हिस्सा हैं, को IDF ने शासन के ऑपरेशन्स का अहम हिस्सा बताया, जिसमें भीड़ नियंत्रण, ट्रांसपोर्टेशन रूट सिक्योरिटी और फैसिलिटी प्रोटेक्शन शामिल हैं। इन बलों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ईरान के अंदर विरोध प्रदर्शनों को दबाने और आम लोगों के खिलाफ “सिस्टेमैटिक और क्रूर हिंसा” को बढ़ावा दिया है।

यह हमला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जब 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के जॉइंट मिलिट्री हमलों में कई सीनियर ईरानी नेता मारे गए थे। जवाब में, तेहरान ने कई अरब देशों में अमेरिकी मिलिट्री बेस और इज़राइली एसेट्स को निशाना बनाकर काउंटर-स्ट्राइक किए। इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर इस संघर्ष को लेबनान तक बढ़ाया, और हिज़्बुल्लाह व ईरान समर्थित मिलिटेंट ग्रुप्स को निशाना बनाया।

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