
मोटापा आज के समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है. अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण लोगों का वजन तेजी से बढ़ रहा है. मोटापा केवल शरीर का आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकता है. जब डाइट, एक्सरसाइज और दवाइयों से वजन कम नहीं होता, तब डॉक्टर वेट लॉस सर्जरी की सलाह देते हैं. मेडिकल भाषा में इसे बेरिएट्रिक सर्जरी कहा जाता है.
यह एक विशेष सर्जिकल प्रक्रिया होती है जिसका मकसद शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाना और मोटापे से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करना होता है. आमतौर पर यह सर्जरी उन लोगों को सलाह दी जाती है जिनका बीएमआई 35 से 40 या उससे अधिक होता है और जिन्हें मोटापे के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी होने लगती हैं.
डॉक्टरों के अनुसार इस सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा तेजी से वजन कम होना है. सर्जरी के बाद पहले 12 से 18 महीनों के भीतर मरीज अपने अतिरिक्त वजन का लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है. वजन कम होने के साथ ही शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलता है. कई मामलों में सर्जरी के कुछ दिनों बाद ही मरीजों के टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं.
इसके अलावा वेट लॉस सर्जरी जोड़ों के दर्द को कम करने, हृदय रोग के खतरे को घटाने और व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है. वजन कम होने से जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आता है और लोग ज्यादा एक्टिव महसूस करते हैं.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं. सर्जरी के बाद इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए डॉक्टर मरीजों को सावधानी बरतने और जरूरी दवाइयां लेने की सलाह देते हैं. लंबे समय में कुछ लोगों में शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है क्योंकि शरीर भोजन को पहले की तरह अवशोषित नहीं कर पाता. कुछ मामलों में डंपिंग सिंड्रोम, गॉलब्लैडर स्टोन या हर्निया की समस्या भी सामने आ सकती है.
हालांकि आधुनिक लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीक के आने से इन जोखिमों में काफी कमी आई है और अब यह सर्जरी काफी सुरक्षित मानी जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक सही डॉक्टर की सलाह और नियमित फॉलोअप के साथ यह सर्जरी मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी समाधान साबित हो सकती है.









