
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने देश में लगातार बढ़ रही मंहंगाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से मोदी सरकार ने महंगाई को कम रखने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होंगे, मोदी सरकार घरेलु गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर पूरे देश में महंगाई बम फोड़ेगी। उन्होंने कहा कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम 525 रुपए पहले ही बढ़ चुके हैं। पेट्रोल, सीमेंट, ब्रेड और जूते महंगे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश महंगाई के खौफ में हैं, सिलेंडर के लिए लाइनों में लगा है, लेकिन मोदी जी पूरे फुर्सत में हैं। वह फीटे काट रहे हैं और चुनावी रैलियां कर रहे हैं। मोदी जी जानबूझ कर देश में कोरोना जैसे हालात पैदा कर रहे हैं, ताकि उनके बिजनेसमैन दोस्त मुनाफा कमा सकें।

बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर अनुराग ढांडा ने कहा कि देश एक बेहद गंभीर दौर से गुजर रहा है और महंगाई का बम रोजाना आम लोगों के घरों में फोड़ा जा रहा है। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार इसको इस तरह से पेश करने का प्रयास कर रही है ताकि इसका असर अभी दिखाई न दे, क्योंकि कुछ ही दिनों में कई राज्यों के अंदर चुनाव हैं। भाजपा सरकार को चुनाव के अलावा किसी और चीज की चिंता होती नहीं है। इसलिए अभी इसके असर को कम करके दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में जिन उत्पादों के दाम बढ़े हैं, वह साफ इशारा है कि आने वाले दिन बेहद भयानक होने वाले हैं।
अनुराग ढांडा ने बताया कि पिछले दो महीने में कमर्शियल गैस के पांच बार अलग-अलग रेट बढ़ाए गए हैं और कुल मिलाकर कमर्शियल गैस सिलेंडर 525 रुपए महंगा हो चुका है। कमर्शियल और घरेलू सिलेंडर दोनों में गैस तो एक ही जैसी होती है, लेकिन अभी घरेलू सिलेंडर के दाम सरकार ने रोक रखे हैं। अगर समस्या है तो दोनों में ही है, लेकिन इसे इसलिए रोक रखा है कि जैसे ही चुनाव निपटेंगे, सरकार यह सारी वसूली आम लोगों से कर लेगी। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होते ही सब जगह होटलों में खाना महंगा हो गया है। होटलों में खाना महंगा हुआ तो सभी एग्रीगेटर्स ने खाने की डिलीवरी भी महंगी कर दी है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि इसके अलावा प्रीमियम पेट्रोल पिछले एक महीने के अंदर 15 रुपए महंगा हो चुका है। सीमेंट के कट्टे 50 से 100 रुपए तक महंगे हो गए हैं। विमान ईंधन के दाम जिस तरीके से बढ़ाए गए हैं, उसमें घरेलू उड़ानों के लिए 8.5 फीसद और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 114 फीसद से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर हवाई किराए पर होने वाला है। घरेलू उड़ान का किराया तुरंत 500 रुपए बढ़ जाएगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ान के टिकट के दाम 200 डॉलर से ज्यादा बढ़ जाएंगे। रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली ब्रेड का रेट अचानक से 30 रुपए से बढ़कर 35 रुपए हो गया और पता भी नहीं चला। जूते-चप्पल 25 फीसद तक महंगे हो गए हैं।
अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि इस आग में घी डालने का काम सरकार भी कर रही है। अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से जो बोझ आ रहा है, वह तो आ ही रहा है, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से टोल टैक्स भी 5 फीसद महंगा कर दिया है। इन सभी चीजों का मूल उत्पाद कच्चा तेल है। अगर प्रीमियम पेट्रोल, कमर्शियल गैस, सीमेंट और विमान ईंधन जैसी चीजों पर इतनी तेजी से दाम बढ़ रहे हैं, तो यह साफ इशारा है कि आम लोगों के ऊपर भी यह आफत बहुत जल्द फूटने वाली है। सरकार ने सिर्फ चुनाव की वजह से घरेलू ग्राहकों के लिए इसे बढ़ने से रोका हुआ है।

अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि ऐसी आपात स्थिति में जब देश इतनी गंभीर समस्या से जूझ रहा है और साफ नजर आ रहा है कि आगे का समय कितना भयानक होने वाला है, तब प्रधानमंत्री को क्या करना चाहिए? क्या उनको अपनी कैबिनेट और विशेषज्ञों के साथ बैठकर आगे आने वाले भयानक समय की तैयारी नहीं करनी चाहिए? लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार से फुर्सत नहीं है। अभी दो-तीन दिन पहले वह एक ऐसे एयरपोर्ट का फीता काटने गए हुए थे, जहां से पहली उड़ान दो-तीन महीने बाद उड़ेगी। लेकिन प्रधानमंत्री के लिए फीता काटना जरूरी है। मंगलवार को वह गुजरात के अंदर कहीं रोड शो कर रहे थे, कहीं रैली कर रहे थे, म्यूजियम का उद्घाटन कर रहे थे और कहीं रेल को हरी झंडी दिखा रहे थे। आज प्रधानमंत्री असम में चाय की पत्तियां तोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री जिस चीज को छू लेते हैं, वह महंगी हो जाती है, तो आने वाले समय में चाय के दाम भी बढ़ जाएंगे क्योंकि उन्होंने असम जाकर वहां चुनाव प्रचार करते हुए चाय को हाथ लगा दिया है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि जिस वक्त पूरे देश में आम लोगों के घरों पर आफत टूट रही है, पूरा देश महंगाई के खौफ में है, लोग लाइनों में लगे हुए हैं और उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिस वक्त लोग इस संशय में लाइनों में लगे हैं कि उन्हें कल पेट्रोल मिलेगा या नहीं, क्या ऐसे समय में प्रधानमंत्री को यह शोभा देता है कि वह गंभीर संकट से जूझने और उस पर काम करने की बजाय चुनाव प्रचार करें, फीता काटें और जगह-जगह चुनावी रैलियां करें? क्या राजनीति में सिर्फ चुनाव जीतना ही भाजपा का मकसद है? क्या उन्हें देश के लोगों की कोई परवाह नहीं है? क्या प्रधानमंत्री ने देश और देश के लोगों के प्रति जो संवैधानिक शपथ ली थी, उसकी उन्हें कोई फिक्र नहीं है?

अनुराग ढांडा ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को इस आफत में झोंका और अब इससे बचाने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। शहरों से मजदूर वर्ग और गरीब लोगों ने अभी से पलायन शुरू कर दिया है। कोई मध्यम वर्गीय या अमीर व्यक्ति तो ब्लैक में 5000 रुपए का सिलेंडर भी मजबूरी में ले लेगा, लेकिन वह गरीब व्यक्ति जो रोजाना छोटे सिलेंडर में एक-एक किलो गैस भरवाकर अपना काम चलाता था, उसके पास इस आफत से बचने का कोई कानूनी तरीका नहीं है। वह ब्लैक में भी लेता है तो उसे एक किलो गैस 500 रुपए में मिल रही है। सरकार आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है। सरकार कह रही है कि उनके पास स्टॉक है। अगर स्टॉक है, तो जहां एक किमी लंबी लाइनें लगी हैं, लोग उतने ही सिलेंडर भरवाएंगे जितने उनके घर में होंगे, कहीं और जाकर नाले में तो गैस स्टोर कर नहीं लेंगे, जैसा कि प्रधानमंत्री कहते हैं।

अनुराग ढांडा ने कहा कि इसका मतलब यह है कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार देश को असली तस्वीर नहीं दिखाना चाहती। वह असली संकट पर कोई योजना नहीं बनाना चाहती और देश को जबरदस्ती एक आफत की तरफ धकेल रही है। प्रधानमंत्री ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि कोरोना जैसे हालात होने वाले हैं। अब ऐसा लगता है कि वे खुद प्रयास कर रहे हैं कि कोरोना जैसे हालात बनें, ताकि वे इस आपदा में अवसर तलाश कर अपने व्यापारी दोस्तों को खूब मुनाफा कमा सकें।









