बिजनौर में सपा सांसद रुचि वीरा के समर्थकों और सावित्री देवी ट्रस्ट के बीच भूमि विवाद भड़का; प्रशासन ने मांगे दस्तावेज

बैराज रोड पर अस्पताल निर्माण की योजना के बीच दोनों पक्ष आमने-सामने; ट्रस्ट ने कोर्ट के स्टे आदेश का हवाला दिया, सांसद समर्थकों ने पक्ष रखा।

बिजनौर। कोतवाली शहर क्षेत्र के बैराज रोड पर गुरुवार देर शाम उस वर्षों पुराना भूमि विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया, जब समाजवादी पार्टी की मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा के समर्थक और सावित्री देवी ट्रस्ट के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए। तनाव की सूचना मिलते ही तहसीलदार सदर आशीष सक्सेना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।

ट्रस्ट का पक्ष: जमीन हमारे नाम, अस्पताल बनना है

सावित्री देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष रजनीश तोमर के अनुसार, विवादित जमीन ट्रस्ट के नाम दर्ज है और इस पर एक चैरिटेबल अस्पताल का निर्माण प्रस्तावित है। इस के लिए संबंधित विभागों से सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) भी प्राप्त किए जा चुके हैं। श्री तोमर का आरोप है कि गुरुवार शाम सांसद रुचि वीरा के कई समर्थक ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंचे और भूमि के अगले हिस्से पर कब्जे की मंशा से कार्य प्रारंभ कर दिया। उन्होंने आगे बताया, इससे पहले भी इसी भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा चुका है, जिसके उपरांत मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट ने इस भूमि पर स्थगन आदेश (स्टे) जारी कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद आदेश की अवहेलना की जा रही है।

सांसद समर्थकों का जवाब: सीमा से अधिक कब्जे का आरोप

वहीं दूसरे पक्ष की ओर से सांसद समर्थक खुशनूद खां ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर जवाबी आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रस्ट ने स्वयं निर्धारित सीमा से कहीं अधिक अग्र भाग पर कब्जा कर रखा है। तहसीलदार को दिए गए अपने बयान में खुशनूद खां ने स्पष्ट किया, हम केवल राजस्व अभिलेखों में दर्ज सीमा के अनुसार ही अपनी भूमि पर कार्य कराना चाहते हैं।

प्रशासन ने दोनों पक्षों से मांगे अभिलेख, जांच जारी

मौके पर पहुंचे तहसीलदार सदर आशीष सक्सेना ने बताया कि दोनों पक्षों की बात सुनने और उन्हें शांत कराने के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, दोनों पक्षों से संबंधित भूमि के पैमाइशी और कब्जे संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं। शीघ्र ही राजस्व निरीक्षकों की टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर अभिलेखों की जांच की जाएगी। तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही अग्रिम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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