कैबिनेट ने 3 बड़े रेल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी, रेलवे नेटवर्क 901 किलोमीटर तक बढ़ेगा…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी। इससे 19 जिलों में रेलवे नेटवर्क 901 किलोमीटर बढ़ेगा और 4,161 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (CCEA) ने मंगलवार को तीन महत्वपूर्ण रेल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दे दी। इन प्रोजेक्ट्स में नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाड़ी और बुढ़वाल-सीतापुर में तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण शामिल है, जिनकी कुल लागत लगभग 23,437 करोड़ रुपये है।

CCEA ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स से रेलवे की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी, ट्रेनों की गति तेज होगी और कंजेशन में कमी आएगी। साथ ही, यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार और स्वरोज़गार के मौके बढ़ेंगे।

इन प्रोजेक्ट्स की योजना PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जो मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक एफिशिएंसी को बढ़ाने पर केंद्रित है। यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में फैलकर भारतीय रेलवे नेटवर्क को 901 किलोमीटर तक बढ़ाएगा।

प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 4,161 गांवों में बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी आबादी लगभग 83 लाख है। इन ट्रैकों से महाकालेश्वर, रणथंभौर, कुनो और केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों तक ट्रेनों की सुविधा बेहतर होगी।

रेलवे ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स से कोयला, अनाज, सीमेंट, POL, आयरन और कंटेनर सहित 60 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल ट्रांसपोर्टेशन का तरीका है, जिससे CO2 उत्सर्जन 185 करोड़ किलो कम होगा, जो लगभग सात करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है।

रेल नेटवर्क विस्तार से न केवल व्यापार और लॉजिस्टिक्स बेहतर होंगे, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और कनेक्टिविटी के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।

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