
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही सुनील कुमार शुक्ला का वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह वीडियो न केवल पुलिस विभाग के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार और वसूली की पोल खोल रहा है, बल्कि सीधे सिस्टम और आला अधिकारियों को चुनौती भी दे रहा है। लखनऊ कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सुनील शुक्ला ने एक के बाद एक वीडियो जारी कर पुलिस महकमे के भीतर चल रहे कथित ‘काले खेल’ का खुलासा किया है।
आधी रात घर पर दबिश से आक्रोश
सुनील शुक्ला का सबसे नया वीडियो उनके रायबरेली और अमेठी स्थित घरों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद सामने आया है। सिपाही का आरोप है कि रात करीब एक बजे 6 से 7 पुलिसकर्मियों ने उनके घर पर छापा मारा, जहां उनकी बुजुर्ग बीमार मां और बहन मौजूद थीं। भावुक होते हुए सुनील ने सवाल किया, “क्या मैं कोई आतंकवादी या नक्सली हूं जो मेरे घर आधी रात को दबिश दी गई?” उन्होंने अधिकारियों को ललकारते हुए कहा, “मेरी मां ने गीदड़ नहीं, शेर पैदा किया है… मुझे इस तरह दबाया नहीं जा सकेगा।”
ड्यूटी के नाम पर लाखों की वसूली का दावा
सिपाही ने भ्रष्टाचार की पूरी प्रक्रिया बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, रिजर्व पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने और मनचाही पोस्टिंग के नाम पर हर सिपाही और दीवान से हर महीने 2-2 हजार रुपये की वसूली की जाती है। सुनील का दावा है कि करीब 400 पुलिसकर्मियों से लगभग 8 लाख रुपये प्रति माह इकट्ठा किए जाते हैं, जो ‘गार्ड कमांडर’ के जरिए ऊपर तक पहुंचते हैं। उन्होंने वीडियो में “चढ़ना डी” नाम के एक डेटा सिस्टम का भी जिक्र किया, जिसके जरिए यह कथित खेल संचालित होता है।
‘भगत सिंह का अनुयायी हूं, अन्याय नहीं सहूंगा’
सुनील शुक्ला ने खुद को शहीद भगत सिंह का अनुयायी बताते हुए कहा कि वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि विभाग में सुधार की सख्त जरूरत है। सिपाही ने कहा, “मेरा शारीरिक शोषण किया जा सकता है, लेकिन मानसिक रूप से मुझे तोड़ा नहीं जा सकता।”
हालांकि, सिपाही द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस वीडियो ने पुलिस विभाग में पारदर्शिता और निचले स्तर के कर्मियों के उत्पीड़न पर एक नई बहस छेड़ दी है।









