
पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में आखिरकार बलिया के निर्दोष युवक राज सिंह को बड़ी राहत मिली है। सीबीआई (CBI) कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद जब राज सिंह अपने पैतृक घर पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। घर की दहलीज पर कदम रखते ही राज अपनी मां के गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़े। इस दौरान उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर कई गंभीर और हैरान करने वाले आरोप लगाए।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में राज सिंह को संदिग्ध शूटर माना गया था। इसी आधार पर बीते 11 मई को अयोध्या से एसओजी (SOG) की टीम ने उन्हें उठाया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश से उन्हें बंगाल पुलिस अपने साथ ले गई, जहां वह करीब 10 दिनों तक पुलिस, सीआईडी (CID) और सीबीआई की कस्टडी में रहे।
कस्टडी के वो 10 दिन और एनकाउंटर का खौफ
घर लौटने के बाद राज सिंह ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि इस पूरे मामले से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। कस्टडी के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा:
“मुझ पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। अधिकारी बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे कि ‘बोल, तूने मर्डर कैसे किया?’ कोलकाता में भाषा की समस्या के कारण मैं उनकी बातें पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था। मुझे हर वक्त यही डर सता रहा था कि कहीं पुलिस मेरा फर्जी एनकाउंटर न कर दे।”
राज ने आगे बताया कि उनका डर तब कम हुआ जब मामला सीबीआई के हाथ में गया। पूछताछ के दौरान सीबीआई के अधिकारियों ने उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि अगर तुमने कुछ गलत नहीं किया है, तो तुम्हारे साथ कुछ भी गलत नहीं होने दिया जाएगा।
जांच एजेंसियों और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
सीबीआई जांच में बेकसूर साबित होने के बाद अदालत ने राज सिंह को ससम्मान बरी कर दिया। हालांकि, इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक निर्दोष युवक को बिना पुख्ता सबूतों के इतने दिनों तक कस्टडी में रखने और मानसिक प्रताड़ना देने को लेकर अब प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल राज के सुरक्षित घर लौटने से उनके परिवार और करीबियों ने राहत की सांस ली है।









