48.2°C पर खौला बांदा, सुबह 9:30 बजे ही बंद होने लगे बाज़ार; 25 मई से ‘नौतपा’ बरसाएगा आग, 50°C पार जाने की दहशत

'थर्मल लॉकडाउन' से ठप्प जनजीवन; अवैध खनन और घटती हरियाली ने बुंदेलखंड को बनाया 'ओपन-एयर फर्नेस', विशेषज्ञों ने जताई बड़ी चेतावनी

बांदा। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित बांदा जिला इस समय प्रचंड गर्मी की चपेट में है। मई 2026 में 48.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ यह देश और दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शुमार हो चुका है। नौतपा की शुरुआत से पहले ही यहाँ के बाज़ारों में सन्नाटा और सड़कों पर थर्मल लॉकडाउन जैसे हालात बन चुके हैं। सुबह साढ़े नौ बजते ही बाबूलाल चौराहा, महेश्वरी देवी मंडी और पीली कोठी जैसे व्यस्ततम इलाकों की दुकानों के शटर एक-एक कर गिरने लगते हैं और दस बजे तक पूरी सड़क पर खामोशी छा जाती है।

विकास के नाम पर बर्बादी ने बनाया ‘ओपन-एयर फर्नेस’

विशेषज्ञों के अनुसार बांदा की यह भीषण तपिश महज मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि सालों से जारी पर्यावरणीय तबाही का नतीजा है। थोड़े से मुनाफे के लिए खनन माफियाओं ने नदियों का जमकर अवैध खनन किया और पहाड़ियों को बारूद से उड़ाकर समतल कर दिया। कभी छोटी-छोटी पहाड़ियों और जंगलों से घिरे रहने वाले बांदा में अब हरियाली महज 3 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध खनन, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ियों के विनाश और लगातार घटती हरियाली ने पूरे बुंदेलखंड को एक ‘ओपन-एयर फर्नेस’ यानी खुली भट्टी में तब्दील कर दिया है। इस त्रासदी के लिए खनन माफिया से भी अधिक जिम्मेदार धृतराष्ट्र बन चुका प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व है।

25 मई से ‘नौतपा’ का कहर, 50°C पार जाने की आशंका

बांदा की मुसीबतें अभी और बढ़ने वाली हैं। 25 मई से ‘नौतपा’ शुरू हो रहा है—वो नौ दिनों का काल, जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और रोहिणी नक्षत्र के कारण ब्रह्मांड की भीषणतम आग सीधे धरती पर बरसती है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि नौतपा के दौरान बांदा का तापमान सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 50 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। जब नौतपा के बिना ही मई के तीसरे सप्ताह में पारा 48.2 डिग्री छू रहा है, तो 25 मई के बाद की स्थिति की कल्पना मात्र से ही रूह काँप जाती है। यह महज एक आँकड़ा नहीं, बल्कि पूरे अंचल के इंसानों, मवेशियों और बची-खुची वनस्पति के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा है। नौतपा की लू आम हवा नहीं, बल्कि आसमान से बरसते अंगारे होंगे, जो बांदा को पूरी तरह झुलसा कर रख देंगे।

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