BSA अजीत सिंह पर 5 लाख रिश्वत मांगने का केस दर्ज,बाबू ने गायब कीं 29000 शिक्षक भर्ती की फाइलें

हरदोई : उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और रसूख के खेल का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अजीत सिंह के खिलाफ 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और 2 लाख रुपये वसूलने के गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि, इतने बड़े मामले के उजागर होने के बाद भी अब तक आरोपी बीएसए के खिलाफ न तो कोई निलंबन (Suspension) की कार्रवाई हुई है और न ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है, जिसे लेकर प्रशासनिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हैं।

210 एजुकेटर्स की भर्ती में रिश्वतखोरी का खेल
यह पूरा मामला बालवाटिका और प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही 210 एजुकेटर्स (शिक्षकों) की आउटसोर्सिंग भर्ती से जुड़ा हुआ है। इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आउटसोर्स कंपनी को सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से करीब 4500 आवेदन प्राप्त हुए थे। आरोप है कि आवेदनों की स्क्रूटनी और आगे की प्रक्रिया को हरी झंडी देने के बदले मोटी रकम की मांग की जा रही थी। इसी रिश्वतखोरी और उगाही के फेर में पूरी भर्ती प्रक्रिया को करीब 6 महीने तक जबरन रोके रखा गया, जिससे सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी परेशान होते रहे।

सवालों के घेरे में बाबू; 29000 शिक्षक भर्ती की फाइलें गायब!
इस भ्रष्टाचार के खेल की आंच केवल बीएसए तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बीएसए कार्यालय के मुख्य बाबू (क्लर्क) अनुपम मिश्रा की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि जब एक तरफ रिश्वतखोरी का यह खेल चल रहा था, ठीक उसी दौरान बाबू अनुपम मिश्रा ने 29,000 शिक्षक भर्ती मामले में बड़ा खेल कर दिया। उन्होंने माननीय हाईकोर्ट के आदेश पर आई 61 नियुक्तियों से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण फाइलें ही गायब कर दीं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बाबू अनुपम मिश्रा के खिलाफ भी अलग से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

भर्ती प्रक्रिया और साक्ष्यों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
हरदोई शिक्षा विभाग में एक साथ उजागर हुए इन दो बड़े मामलों (रिश्वतखोरी और सरकारी फाइलों की चोरी) के बाद हड़कंप मचा हुआ है। वर्तमान में चल रही नियुक्तियों की पारदर्शिता, पुरानी कोर्ट से जुड़ी फाइलों की सुरक्षा और खुद पूरे BSA कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इन दागी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब तक और क्या कड़ी कार्रवाई की जाती है।

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