
लखनऊ : बुंदेलखंड, जो इलाके के एक बड़े हिस्से को मौरंग, गिट्टी सप्लाई करता है, अब ज़िरकोनियम (एक चमकदार, चांदी जैसी ग्रे धातु) भी देगा जो दांतों को मोती जैसी चमक देने और दूसरे कामों में काम आता है। यहां यह हरपालपुर-महोबकंठ इलाके में मिलता है। बंगाल की एक कंपनी को जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) से क्वालिटी एश्योरेंस के बाद ज़िरकोनियम की माइनिंग का लाइसेंस दिया गया है।
महोबा का ज़िरकोनियम भंडार हाई क्वालिटी का पाया गया
पिछले महीने बुंदेलखंड में ज़िरकोनियम की पुष्टि हुई थी। जिसकी केमिकल टेस्टिंग केंद्रीय खान मंत्रालय के GSI ने की थी। उसमें महोबा का ज़िरकोनियम भंडार हाई क्वालिटी का पाया गया था। यह हाई हीट रेजिस्टेंट धातु है। कम से कम 1855°C पर पिघलता है। इसका इस्तेमाल कई प्लांट, केमिकल इंडस्ट्री, ज्वेलरी, जेम मेकिंग और डेंटिस्ट्री में होता है।
पहली बार जिरकोनियम का भंडार मिला
वही जियोलॉजी और माइनिंग डिपार्टमेंट की सेक्रेटरी माला श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में पहली बार जिरकोनियम का भंडार मिला है। इससे राज्य सरकार को भारी रेवेन्यू मिलेगा। माइनिंग बेस्ड रोजगार के मौके बढ़ेंगे। बुंदेलखंड में इन्वेस्टमेंट भी आएगा। बंगाल की माहेश्वरी माइनिंग कंपनी केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ माइंस के क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के टेंडर में पायनियर रही है। इसे माइनिंग लाइसेंस दिया गया है।
बता दे कि ज़िरकोनियम भारत में उड़ीसा, तमिलनाडु और केरल के मिनरल इलाकों में पाया जाता है, अब उत्तर प्रदेश चौथा राज्य होगा। सेक्रेटरी ने बताया कि राज्य के मुख्य मिनरल्स के 13 ब्लॉक्स के लिए ऑक्शन किया गया था। इसमें से 10 ब्लॉक कंपोजिट लाइसेंस और तीन ब्लॉक माइनिंग लीज़ को मंज़ूरी मिल गई है।
पहले, भारत में सिर्फ़ सरकारी कंपनियों को ही ज़िरकोनियम की माइनिंग का लाइसेंस देने की इजाज़त थी, लेकिन माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में बदलाव के बाद से इसे न्यूक्लियर मिनरल्स की लिस्ट से हटा दिया गया है। अब इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ़ माइन्स प्राइवेट सेक्टर की पार्टनरशिप में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस और माइनिंग लीज़ देता है।









