
रामलला मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब दिन पर दिन गरमाता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण की तपिश अब विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व और उसकी बैठकों तक पहुंच चुकी है। अयोध्या में आगामी 25 से 29 जून तक होने वाली विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति और प्रन्यासी मंडल की पूर्व निर्धारित 5 दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक को अचानक स्थगित कर दिया गया है। हालांकि, संगठन की ओर से इस बैठक को टालने के पीछे ‘अपरिहार्य कारण’ बताए गए हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा कुछ और ही बयां कर रहा है।
बैठक में हंगामे की थी आशंका, सूत्रों का बड़ा दावा
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या की इस उच्चस्तरीय बैठक में रामलला मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों की कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होनी तय थी। इस मामले को लेकर संगठन के भीतर ही भारी नाराजगी है और बैठक में इस विषय पर तीखे सवाल-जवाब और हंगामे की पूरी आशंका जताई जा रही थी। इसी संभावित टकराव और विवाद से बचने के लिए फिलहाल इस बैठक को टालने का निर्णय लिया गया है। यह बैठक अब आगे कब और कहां आयोजित की जाएगी, इस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
हरिद्वार की बैठक में भी गूंजा था मुद्दा, संतों ने खोला मोर्चा
यह पहली बार नहीं है जब चढ़ावा चोरी का यह विवाद विहिप की बैठक के केंद्र में आया हो। इससे पहले हरिद्वार में आयोजित हुई विहिप के मार्गदर्शक मंडल और उच्चाधिकार समिति की बैठक में भी यह मुद्दा पूरी तरह छाया रहा था। वहां मौजूद प्रख्यात संतों ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट रामलला के पास आने वाले एक-एक पैसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। संतों ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ-साथ रामालय ट्रस्ट और राम जन्म मंदिर पुनर्निर्माण ट्रस्ट के सभी बैंक खातों की बारीकी से जांच कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी।









