
पटना। बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए चर्चित भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को भारत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि इस मामले में सिर्फ गोली चलाने वालों ही नहीं, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि इस कथित एनकाउंटर के पीछे कौन लोग जिम्मेदार थे।
इधर, भारत तिवारी संघर्ष समिति की ओर से आयोजित महापंचायत में भारी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली। समिति के सदस्यों ने दावा किया कि करीब एक लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो बिहार विधानसभा का घेराव किया जाएगा और देशभर में चक्का जाम आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पूर्व कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी ने भी महापंचायत का समर्थन करते हुए कहा कि लोग स्वेच्छा से इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और भारत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया जाए।
मृतक के भाई चंदन तिवारी ने भी आंदोलन को दिल्ली तक ले जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह राष्ट्रीय राजधानी जाकर न्याय की मांग करेंगे और लोगों से समर्थन की अपील करेंगे।
वहीं सहरसा के ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के निदेशक रोशन आनंद ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भारत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो फिर उनका एनकाउंटर क्यों किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के बिलौती गांव के निवासी थे और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार तथा बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते थे। 17 जून को हुए विवादित पुलिस एनकाउंटर में उनकी मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस ने जगदीशपुर डीएसपी, शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायत भारत तिवारी की मां द्वारा भोजपुर एसपी को दी गई थी, जिसमें बेटे की गलत तरीके से हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया है।
जन दबाव और राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जांच पूरी होने तक चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।









