
मुजफ्फरनगर। जिले की तितावी क्षेत्र स्थित दोना-पत्तल फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरों पर हुए अत्याचार की रोजाना नई परतें खुलती जा रही हैं। श्रमिकों के दिलो-दिमाग में भले ही मां-बाप और परिजनों की यादें तैरती रहती थीं, लेकिन आंखों के सामने हमेशा सुपरवाइजर जल्लाद बनकर खड़ा रहता था। पीड़ितों के अनुसार, बिजली रहने तक लगातार काम कराया जाता था, रोजाना भोजन नहीं मिलता था, लेकिन यातनाएं और पिटाई जरूर दी जाती थी।
कैसे दी जाती थीं यातनाएं?
श्रमिकों ने पुलिस को बताया कि सुपरवाइजर शिवा त्यागी और मुख्य आरोपी अंकित बालियान उन पर हथौड़ों से वार करते थे और पेचकस से कमर व हाथों को चीर देते थे। करीब डेढ़ साल तक लगातार मिली इन अमानवीय यातनाओं के कारण श्रमिकों की मानसिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी है और चिकित्सकीय जांच में वे सभी गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए हैं।
पहली बार मिला पौष्टिक भोजन
गुरुवार को तितावी थाने पर बंधनमुक्त कराए गए श्रमिकों को भोजन कराया गया, जहां लंबे अरसे बाद उन्हें स्वच्छ और पौष्टिक खाना मिला। हलवा, पूरी, छोले-आलू की सब्जी और रायता खाने के बाद श्रमिकों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें इस तरह का भोजन करीब छह महीने बाद नसीब हुआ है।
पुलिस ने क्या बताया?
एसपी देहात अक्षय संजय महाडीक ने बताया कि फैक्ट्री से भाग निकले एक मजदूर की शिकायत पर सोमवार को ‘किसान सरकार हाउस’ नामक इस फैक्ट्री पर छापा मारकर 13 श्रमिकों को बंधनमुक्त कराया गया था। चिकित्सकीय परीक्षण में सभी श्रमिकों के शरीर पर चोट और घाव के निशान मिले हैं और खान-पान की भारी कमी के कारण हड्डियां तक दिखने लगी थीं। पुलिस अब उनका विस्तृत चिकित्सा परीक्षण करा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि शरीर के अंदरूनी अंगों पर इन यातनाओं का कोई गंभीर असर तो नहीं पड़ा है।
दो साथियों की मौत का दावा
श्रमिकों ने पुलिस को यह भी बताया कि यातनाओं के दौरान उनके दो साथियों की मौत हो चुकी है और दोनों के शवों को बोरे में भरकर कहीं फेंक दिया गया था। पुलिस ने इस गंभीर दावे की जांच शुरू कर दी है।









