
कश्मीर में शनिवार शाम को भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। भूकंप की तीव्रता 6.2 दर्ज की गई। भूकंप की गहराई 215 km दर्ज की गई। नेशनल सेंटर फॉर अर्थक्वेक साइंस के मुताबिक, शनिवार शाम 7:40 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए।
भारत में भूकंप के ज़ोन कौन से हैं ?
जियोलॉजिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत के कुल ज़मीनी इलाके का लगभग 59 परसेंट हिस्सा भूकंप के लिहाज़ से सेंसिटिव माना जाता है। साइंटिस्ट्स ने भारत में भूकंप के ज़ोन को 4 हिस्सों में बांटा है, यानी ज़ोन-2, ज़ोन-3, ज़ोन-4 और ज़ोन-5। ज़ोन-5 वाले इलाके सबसे ज़्यादा सेंसिटिव माने जाते हैं, जबकि ज़ोन-2 वाले सबसे कम सेंसिटिव माने जाते हैं। हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के ज़ोन-4 में आती है। यहां 7 से ज़्यादा मैग्नीट्यूड के भूकंप भी आ सकते हैं, जिससे बड़ी तबाही हो सकती है। भारत में, हिमालयी इलाका और कुछ दूसरी फॉल्ट लाइन (जैसे कच्छ, नॉर्थईस्ट इंडिया) भूकंप के लिए ज़्यादा संवेदनशील हैं, क्योंकि इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराती है।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की इंटेंसिटी
भूकंप की मैग्नीट्यूड रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करके मापी जाती है। रिक्टर स्केल पर 4 से 4.9 मैग्नीट्यूड के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है। 5 से 5.9 मैग्नीट्यूड वाले भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकते हैं। 6 से 6.9 में बेस डरक कटो है। 7 से 7.9 में बिल्डिंग्स गिर जाती हैं। 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज़्यादा तबाही मचती है। 9 या ज़्यादा में सबसे ज़्यादा तबाही तबाही होती है।
भूकंप क्यों आते हैं?
हाल के दिनों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप के आने के मामले बढ़े हैं। हमारी धरती के अंदर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स लगातार अपनी जगह पर घूमती रहती हैं। हालांकि, कभी-कभी इनके बीच टकराव या रगड़ हो जाती है। इसी वजह से धरती पर भूकंप आते हैं। हमारी ज़िंदगी को सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। भूकंप से घर गिर जाते हैं, जिससे हज़ारों लोग मारे जाते हैं।









