राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या बार को दी नसीहत, बोले- ‘आरोपियों को भी है वकील पाने का हक’

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया मोड़ आ गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या बार एसोसिएशन द्वारा आरोपियों का केस न लड़ने और पैरवी करने पर जुर्माना लगाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे प्रोफेशनल एथिक्स और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।

अयोध्या: भव्य राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और वित्तीय गबन के मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। एक तरफ जहां एसआईटी ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से पूछताछ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में अब एक नया कानूनी और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अयोध्या बार एसोसिएशन के उस फैसले पर तीखे सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने आरोपियों की पैरवी न करने का एलान किया था। आलोक कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले के आरोपियों का केस भी अयोध्या के वकीलों को लड़ना चाहिए।

संवैधानिक सिद्धांतों और प्रोफेशनल एथिक्स का दिया हवाला

आलोक कुमार ने अयोध्या बार और स्थानीय वकीलों को नसीहत देते हुए सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा और विस्तृत पोस्ट साझा किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में न्यायपालिका और देश के संविधान की मूल भावना का जिक्र करते हुए लिखा, “हमारे देश के कानून में हर आरोपी को तब तक बेगुनाह माना जाता है जब तक कि उसका दोष साबित न हो जाए। ऐसे में हर नागरिक को न्याय और अपनी पैरवी के लिए वकील पाने का पूरा अधिकार है।”

उन्होंने बार एसोसिएशन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी वकील को किसी आरोपी की पैरवी करने से रोकना या पैरवी करने पर जुर्माने की बात करना पूरी तरह से संवैधानिक सिद्धांतों और वकीलों के प्रोफेशनल एथिक्स (व्यावसायिक नैतिकता) के खिलाफ है।

कोर्ट के पुराने फैसलों का दिया हवाला

अपने इस रुख को कानूनी रूप से मजबूत करने के लिए वीएचपी अध्यक्ष ने देश की शीर्ष अदालतों (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा पूर्व में दिए गए कई ऐतिहासिक फैसलों और आदेशों का भी हवाला दिया। उन्होंने समझाया कि बार एसोसिएशन को इस तरह के प्रस्ताव पास करने का कानूनी अधिकार नहीं है जो किसी व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधित्व के मौलिक अधिकार का हनन करते हों।

बता दें कि इससे पहले अयोध्या के वकीलों की बगावत और चंपत राय व अनिल मिश्रा को अयोध्या छोड़ने के अल्टीमेटम की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद वकीलों ने एकजुट होकर आरोपियों का बहिष्कार करने की बात कही थी। अब हिंदूवादी संगठन वीएचपी के शीर्ष नेता के इस बयान ने इस पूरे मामले को एक नया कानूनी और वैचारिक मोड़ दे दिया है।

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