मिडिल ईस्ट में शांति के लिए PM मोदी का बड़ा कूटनीतिक कदम, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से की बात, जहाजों की सुरक्षा को बताया बेहद अहम…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच 14-पॉइंट MoU पर हुई प्रगति का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने भारत और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा के लिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही की आजादी और इस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने पर विशेष जोर दिया।

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वैश्विक शांति के लिए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। पीएम मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर लंबी बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी खत्म करने के उद्देश्य से हुए ’14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) और कूटनीतिक बातचीत में हुई प्रगति का गर्मजोशी से स्वागत किया। साथ ही उन्होंने भारत और पूरी दुनिया के आर्थिक हितों से जुड़े बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में नेविगेशन और कमर्शियल जहाजों के बिना रुकावट आने-जाने की आजादी पर विशेष बल दिया।

होर्मुज स्ट्रेट का खुलना और शांति प्रयासों की जरूरत

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पीएम मोदी को पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों और शांति स्थापना के आगे के रास्ते के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बातचीत की जानकारी देते हुए लिखा, “ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से बात की। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इन लगातार कोशिशों से इस इलाके में पक्की शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की आज़ादी की अहमियत को दोहराया।” उल्लेखनीय है कि इस नए MoU में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान पर लगी वित्तीय पाबंदियों में ढील देने के महत्वपूर्ण नियम शामिल हैं।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

पश्चिम एशिया में इस साल शुरू हुए संघर्ष के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी टेलीफोनिक बातचीत थी। इससे पहले 12 और 21 मार्च को हुई वार्ताओं में भी पीएम मोदी ने इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था। भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान ने साफ किया है कि दोहा में कतर की मध्यस्थता से होने वाली आगामी बैठक वॉशिंगटन के साथ कोई राजनीतिक बातचीत नहीं है, बल्कि फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर के ईरानी फंड को रिलीज करने और तकनीकी नियमों को लागू करने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण टेक्निकल बैठक है।

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