
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के मंच से एक ऐसा चौंकाने वाला और ऐतिहासिक उलटफेर सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों को सन्न कर दिया है। चार बार की वर्ल्ड कप चैंपियन जर्मनी की टीम राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में ही पैराग्वे से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। जर्मनी के फुटबॉल इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब टीम को किसी वर्ल्ड कप मैच में पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा हो। इस शर्मनाक हार के बाद जर्मनी के पूर्व महान खिलाड़ी और 1990 वर्ल्ड कप विजेता जुर्गेन क्लिंसमैन का गुस्सा फूट पड़ा है।
VAR के फैसले ने बदला मैच का रुख, पेनल्टी में चूका जर्मनी
जर्मनी और पैराग्वे के बीच खेला गया यह नॉकआउट मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। एक्स्ट्रा टाइम के 101वें मिनट में जोनाथन ताह ने कॉर्नर से एक शानदार हेडर के जरिए गोल दागकर जर्मनी को 2-1 की बढ़त दिला दी थी। जर्मन खेमे को लगा कि उन्होंने राउंड ऑफ 16 में जगह पक्की कर ली है, लेकिन तभी वीडियो असिस्टेंट रेफरी ने खेल का रुख बदल दिया। रेफरी जलाल जाएद ने रिव्यू के बाद फैसला सुनाया कि जर्मनी के डिफेंडर वाल्डेमर एंटोन ने बिल्ड-अप के दौरान पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल को गलत तरीके से रोका था और गोल को नामंजूर कर दिया। आखिरकार मैच पेनल्टी शूटआउट में गया, जहां पैराग्वे ने शानदार खेल दिखाते हुए 5-3 से बाजी मार ली।
कोचिंग स्टाफ से लेकर फेडरेशन तक सब पर उठें सवाल: क्लिंसमैन
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ESPN से बातचीत में जुर्गेन क्लिंसमैन ने जर्मन फुटबॉल एसोसिएशन (DFB) और खिलाड़ियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जर्मन फुटबॉल गहरे संकट में है। क्लिंसमैन ने कहा, “आज रात जिस तरह से हम बाहर हुए, वह बहुत बुरा है। यह एक ऐसी शर्म की बात है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। इसकी जिम्मेदारी कोचिंग स्टाफ से लेकर फेडरेशन और टीम के हर एक खिलाड़ी की है। ऊपर से नीचे तक हर चीज पर सवाल उठाए जाने चाहिए और इसके कड़े नतीजे होने चाहिए।” क्लिंसमैन ने आगे चिंता जताते हुए कहा कि टीम के भीतर 120 मिनट के नॉकआउट मुकाबले को बनाए रखने के लिए जरूरी जोश, एनर्जी और आक्रामकता की भारी कमी दिखाई दी।









