एक करोड़ का माल, BMW कार और थाईलैंड तक फैला व्यापार, कैसे शातिर चोरों ने बनाया था हाई-टेक नेटवर्क?

गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। ये चोर कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि बेहद शातिर हैं जो करोड़ों के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चुराने के लिए लग्जरी ‘बीएमडब्ल्यू’ कार का इस्तेमाल करते थे। स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और ट्रोनिका सिटी पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में तीन आरोपियों—अदनान उर्फ अज्जू, आमिर और सौरभ को रंगे हाथों पकड़ा गया है।

जेल में रची गई साजिश, स्क्रैप से करोड़ों की कमाई

पूछताछ में आरोपियों के कबूलनामे ने पुलिस को भी चौंका दिया। गिरोह का मुख्य सदस्य आमिर पहले स्क्रैप (कबाड़) का काम करता था, लेकिन जेल में उसकी मुलाकात इसी धंधे के उस्तादों से हुई। वहीं, अदनान उर्फ अज्जू फरीदाबाद में अपने पिता की दुकान चलाता था, लेकिन जल्द पैसा कमाने की हवस में उसने चोरी के सामान को ठिकाने लगाने का काम शुरू कर दिया। इस गिरोह का तीसरा सदस्य सौरभ नगर निगम में सफाई कर्मचारी है, जो आमिर के संपर्क में आते ही अपराध की दुनिया का हिस्सा बन गया।

देशभर में फैला था जाल, थाईलैंड-हांगकांग तक कनेक्शन!

पकड़े गए आरोपियों ने गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिम बंगाल तक अपना जाल फैला रखा था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि ये गिरोह न केवल देश के विभिन्न राज्यों में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था, बल्कि मेरठ के कुछ कारोबारियों के जरिए इस चोरी के सामान को आगे खपाता था। अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि क्या ये कीमती उपकरण हांगकांग और थाईलैंड जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्करी के जरिए भेजे जा रहे थे।

क्या होते हैं ये उपकरण और क्यों हैं इतने महंगे?

पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 रिमोट रेडियो यूनिट (RRU), 7 बेस बैंड यूनिट (BBU) और एक रेडियो रिसीवर यूनिट चेकिंग मशीन बरामद की है। बेस बैंड यूनिट (BBU) मोबाइल टावर का ‘दिमाग’ मानी जाती है, जिसकी कीमत बाजार में 5 से 10 लाख रुपये तक होती है। वहीं, रिमोट रेडियो यूनिट (RRU) की कीमत भी 1.5 से 2 लाख रुपये के बीच होती है। ये उपकरण मोबाइल सिग्नल को सुचारू रखने के लिए अनिवार्य हैं, जिनकी चोरी से टावरों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

पुलिस की आगे की कार्रवाई

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजकरन नैय्यर के अनुसार, आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर इस गिरोह के बाकी साथियों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस अब उन व्यापारियों की भी सूची तैयार कर रही है जो इस चोरी के नेटवर्क को पाल रहे थे। यह गिरफ्तारी मोबाइल टावर कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले कुछ समय से इन उपकरणों की चोरी से ऑपरेटरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।

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