लखनऊ के समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 250 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी, 100 से ज्यादा कर्मचारी हिरासत में लिए गए

लखनऊ के विभूति खंड थाना इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है । बता दे कि समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया। कॉल सेंटर सोलारिस सॉल्यूशन के नाम से चल रहा था। यहां बैठकर डॉलर ऐप के जरिए विदेशी नागरिकों को टारगेट किया जाता था।

पुलिस ने करीब 12 घंटे तक कॉल सेंटर में सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके बाद 2 ऑपरेशन मैनेजर समेत 119 युवकों को हिरासत में लिया गया। आरोपियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से पुलिस को बसें बुलानी पड़ीं। बाहर निकलते समय युवतियां अपने स्कार्फ और हाथों से चेहरा छिपाती नजर आईं।

हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी

DCP क्राइम अनिल यादव के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। अब तक की जांच में पता चला है कि टेली कॉल करने वालों को 30 से 40 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। कॉल सेंटर में काम करने वालों के लिए इंग्लिश ज़रूरी थी, ताकि वे विदेशी नागरिकों से बातचीत कर सकें। सभी को ट्रेनिंग भी दी गई थी। कॉल करने वाले फ्रॉड के लिए वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सिस्टम का इस्तेमाल करते थे। उनके साथी भी US में मौजूद हैं, जो सभी को गाइड करते थे। मामले की पूरी जांच की जा रही है। गैंग में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं

पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात को छापेमारी की गई और सभी से पूछताछ शुरू हुई। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैरजानी और विक्रम सिंह परमार ने शुरू में पुलिस को गुमराह किया। दूसरी तरफ, पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं। बड़ी संख्या में महिला पुलिस को बुलाया गया। जांच मंगलवार देर रात शुरू हुई और बुधवार शाम तक चलती रही। ललित और विक्रम ने गैंग के सरगना समेत कुछ बड़े लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। लखनऊ पुलिस गुरुवार को पूरे मामले की जानकारी देगी।

खुद को एफबीआई अधिकारी बताते थे ठग

वही यूएस में बैठे गिरोह के जालसाजों ने वहां की कंपनियों के टोल फ्री नंबर डुप्लीकेट बना रखे थे। इसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया था। जैसे ही कोई व्यक्ति टोल फ्री नंबर तलाश कर उसपर फोन करता था तो वीओआईपी सिस्टम के जरिये उनकी कॉल समिट बिल्डिंग स्थित सेंटर पर ट्रांसफर हो जाती थी।

इसके बाद टेली कॉलर्स सक्रिय हो जाते थे और बातचीत से लोगों को अपने जाल में फंसा लेते थे। गिरोह के लोग खुद को एफबीआई अधिकारी बताकर पोर्नोग्राफी के मामले में जेल भेजने की धमकी देते थे। फर्जी कॉल सेंटर से बरामद डिजिटल उपकरण और दस्तावेजों की पुलिस फोरेंसिक जांच कराएगी।

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