‘TMC का मतलब स्कैम, फ्रॉड और धोखा’, मंत्री इंद्रनील खान ने ममता सरकार के “थ्रेट कल्चर” पर साधा निशाना…

पश्चिम बंगाल के मंत्री इंद्रनील खान ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर मेडिकल कैंपों के संचालन में गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान मेडिकल कॉलेजों में "थ्रेट कल्चर" (धमकी का माहौल) आम था, जिसके तहत इंटर्न्स को सीनियर डॉक्टर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया गया।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्य सरकार के बीच कड़ा टकराव देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल के मंत्री इंद्रनील खान ने बुधवार को सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी और उसके राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। खान ने पार्टी पर स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल कैंपों के संचालन में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्वास्थ्य मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री रहने के दौरान राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में एक “थ्रेट कल्चर” (धमकी का माहौल) हावी था।

‘एलोपैथिक कैंप में आयुर्वेदिक डॉक्टर को बनाया कार्डियोलॉजिस्ट’

मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए मंत्री इंद्रनील खान ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला और कहा, “TMC का सीधा मतलब स्कैम, फ्रॉड और धोखा बन चुका है।” उन्होंने एक कथित उदाहरण देते हुए दावा किया कि एलोपैथिक मेडिकल कैंपों में आयुर्वेदिक डॉक्टरों को विशेषज्ञ (स्पेशलिस्ट) के तौर पर पेश करके जनता की आंखों में धूल झोंकी गई। खान ने कहा, “एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को आयुर्वेद पद्धतियों के जरिए ही मरीजों का इलाज करना चाहिए, जो कि स्वाभाविक है। लेकिन आप सोचिए कि किसी एलोपैथिक कैंप में किसी डॉक्टर को कार्डियोलॉजिस्ट (दिल का डॉक्टर) बताया जाए और केबिन में जाने पर वहां एक आयुर्वेदिक डॉक्टर बैठा मिले। यह जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।”

अभिषेक बनर्जी के कैंपों में ‘थ्रेट कल्चर’ का दावा

इंद्रनील खान ने अपने आरोपों की धार को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ममता बनर्जी स्वास्थ्य मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री थीं, तब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में धमकी का माहौल बेहद आम बात हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि यही संस्कृति अभिषेक बनर्जी द्वारा आयोजित किए जाने वाले मेडिकल कैंपों तक भी पहुंच गई थी।

खान ने कहा, “नियम के मुताबिक, मेडिकल इंटर्न्स को अकेले स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का अधिकार नहीं होता है; उनका काम केवल सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में काम को देखना और सीखना होता है। इसके बावजूद, अभिषेक बनर्जी के कैंपों में इन इंटर्न्स को जबरन सीनियर डॉक्टर की तरह काम करने के लिए मजबूर किया गया, जो अपने आप में एक बड़ा फ्रॉड है।” उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संरक्षण और सपोर्ट से इस कथित फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। हालांकि, अंत में उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों से यह थ्रेट कल्चर खत्म हो रहा है और गलत करने वालों को जल्द ही कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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