महाविनाश की दहलीज पर मध्य पूर्व: अमेरिका-ईरान के बीच टूटा समझौता, क्या अब तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया?

पश्चिम एशिया में बीते चार महीनों से जारी अस्थिरता अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहाँ से वापसी के रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि जून में हुए ‘इस्लामाबाद समझौते’ के जरिए क्षेत्र में शांति बहाल होगी, लेकिन महज दो हफ्ते के भीतर ही यह 60 दिनों का संघर्ष विराम पूरी तरह तार-तार हो गया है। आज पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है, जहाँ से स्थिति किसी भी क्षण बेकाबू होकर बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध में बदल सकती है।

विवाद की जड़: तेल और समझौतों का खेल

इस पूरे तनाव के केंद्र में ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। 18 जून को हुए समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को ‘जनरल लाइसेंस X’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की सीमित छूट दी थी। बदले में ईरान को अपने आक्रामक सैन्य रुख पर लगाम लगानी थी। लेकिन, मंगलवार को ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सऊदी अरब और कतर के तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद समीकरण बदल गए। ईरान का तर्क है कि इन जहाजों ने उनकी चेतावनी को नजरअंदाज किया, लेकिन अमेरिका ने इसे सीधे तौर पर समझौते का उल्लंघन माना।

अमेरिकी पलटवार और तेहरान पर बमबारी

अमेरिकी प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। हमले के तुरंत बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के अंदर रणनीतिक ठिकानों को नष्ट करने का अभियान छेड़ दिया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने सटीक हथियारों से ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल नेटवर्क, तटीय राडार और जहाज-रोधी मिसाइलें शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रहार ईरान की नौसैनिक ताकत पर हुआ है, जहाँ उनकी 60 से ज्यादा छोटी नावों को ध्वस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही, अमेरिका ने ईरान को दी गई तेल बेचने की छूट भी वापस ले ली है और ‘जनरल लाइसेंस X1’ लागू कर दिया है, जिसके तहत ईरान के लिए डॉलर में व्यापार करना असंभव हो गया है।

कुवैत पर मिसाइलों की बौछार

इस संघर्ष का दायरा अब ईरान से बाहर निकलकर खाड़ी देशों तक फैल गया है। अमेरिका के जवाबी हमलों से बौखलाए ईरान ने कुवैत को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुवैती सेना के अनुसार, देश की सीमाओं पर दुश्मन की मिसाइलें और ड्रोन देखे गए हैं। पूरे कुवैत में एयर रेड साइरन बजा दिए गए हैं और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि कुवैती सेना ने धमाकों की आवाजों पर स्पष्ट किया है कि ये उनके द्वारा आसमान में मार गिराए गए मिसाइलों के अवशेष हैं, लेकिन नागरिकों के बीच डर का माहौल व्याप्त है।

दुनिया पर गहराता आर्थिक संकट

इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नई चिंता में डाल दिया है। दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। संघर्ष के कारण इस रास्ते की सुरक्षा दांव पर है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल और WTI 71 डॉलर के पार पहुंच गया है। यदि यह तनाव इसी तरह बना रहा, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा व्यवधान देखने को मिल सकता है।

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