
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू कराया गया है। ट्रस्ट ने इस घटना को अपनी चूक मानते हुए विधि-विधान से मंदिर की पवित्रता और शुद्धिकरण के लिए विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया है।
दस दिनों तक चलने वाले इस प्रायश्चित पूजन में मंदिर परिसर के अंदर और बाहर कुल 70 वैदिक आचार्य शामिल हैं। गर्भगृह और परकोटा क्षेत्र में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और रामार्चा पूजन किया जा रहा है।
चोरी जैसी घटना के बाद जरूरी होता है प्रायश्चित पूजन
बताया जा रहा है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी प्रकार की अपवित्रता या चोरी जैसी घटना के बाद मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रायश्चित अनुष्ठान किया जाता है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि किसी भी भूल का सबसे पहला प्रायश्चित यही है कि वह दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्थाओं की शुरुआत भी की गई है।
स्वामी गोविंददेव गिरि कर रहे विशेष जप और स्त्रोत पाठ
स्वामी गोविंददेव गिरि ने बताया कि व्यक्तिगत रूप से भी उन्हें प्रायश्चित करना चाहिए, इसलिए वह प्रतिदिन विशेष जप और स्त्रोत पाठ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक भवन नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
ट्रस्ट ने सुरक्षा और व्यवस्था मजबूत करने पर दिया जोर
ट्रस्ट का कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां भगवान का वास है। ऐसे में मंदिर की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखना ट्रस्ट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है।









